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अयोध्या के संतो ने योगी के खिलाफ दिखाई अपनी नाराजगी, पूछा क्या अब बसपा में शामिल हो जाएँ हनुमानभक्त

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(Image Credits: The Indian Express)

राजस्थान में विधानसभा चुनावों से जुडी एक जनसभा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हनुमान जी की जाति बताते गिरवासी आदिवासी दलित कह दिया था। उनके इस बयान को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। इस मामले के चलते अयोध्या के संतो ने अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। संतो ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा की राजनीति में कुछ भी कहना अब नेताओं की आदत है लेकिन योगी जी एक संत होकर ऐसा बयान दे रहे हैं उन्हें यह शोभा नहीं देता।

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श्री राम जन्मभूमि के मुख्या अर्चक आचार्य सतेंद्र दास का कहना है की हनुमान जी तो भगवान शिव के अवतार है। हनुमान जी ने बन्दर के रूप में इसलिए अवतार लिया क्योंकि रावण ने तपस्या के दौरान ब्रम्हा जी से यह वरदान माँगा था की उसकी मृत्यु का कारण कोई जीव न बने। परन्तु ब्रम्हा जी ने यह वरदान देने से मना कर दिया और उसके बाद ब्रम्हा जी ने कहा तुम्हारी मृत्यु का कारण मनुष्य और वानर दोनों मिल कर बनेंगे।

इसलिए भगवान विष्णु को मानव के रूप में और भगवान शिव वानर के रूप में जन्म लिया और रावण अवध में अपनी भूमिका निभाई। महंत सत्येंद्र दास का कहना है की अगर राजनीति में हनुमान जी को गिरवासी दलित कहा जाये तो यह गलत है क्योंकी वह तो देवता है। इस प्रकार से जो हनुमान जी के भक्त है उनको योगी जी के बयान से आहत पहुंचा होगा। वह इतने बड़े प्रान्त के मुख्यमंत्री है उनको ऐसा बयान देना शोभा नहीं देता और राजनीति में भगवान को नहीं लाना चाहिए।

 

मुंबई से आये महंत आनंद दास ने अपनी नाराजगी भरे अंदाज में कहा की योगी आदित्यनाथ के 2 स्वरूप है। एक तो वह संत है और एक सफल राजनीतिज्ञ भी। अगर उन्होंने यह बात संत के रूप में कहा है उन्होंने अपने शोध के आधार पर यह बात कही होगी। हो सकता है उनका कहना सही भी हो लेकिन मेरे हिसाब से भारत के जितने भी देवी देवता है इनको जाति में बांधना एक मूर्खता है।

हमारे देवी देवता किसी जाति के नहीं वह पुरे विश्व के भगवान् है। सभी समाज के लोग उनकी पूजा करते है। एक संत के रूप में अगर उन्होंने यह बयान दिया है तो वह उनके निजी विचार है। अगर राजनीति के लिए इस प्रकार का बयान दिया है तो हम इसकी घोर निंदा करते है। इस बयान से देश के सवा करोड़ हिन्दुओं का अपमान हुआ है उनकी भावना को ठेस पहुंची है।


 

डॉ डेवेशाचार्य का कहना है की अगर योगी जी ने हनुमान जी को दलित कहा है तो यह निंदनीय है। हालाँकि राजनीति में सब कुछ चलता है और लोग किसी को कुछ भी कह सकते है। लेकिंग योगी जी मुख्यमंत्री होने के साथ एक संत भी है और उन्हें यह बयान नहीं देना चाहिए था। महंत दिलीप दास ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा की वोट की राजनीति में राजनेता अंधे हो जाते है।

अभी तक लोगो को जाति के आधार पर बांटा जा रहा था परन्तु अब देवताओं को भी बाटना शुरू कर दिया है। सबसे दुख की बात यह है की भाजपा अभी तक हिंदुत्व के नाम पर राजनीति करती थी और उसी के नेता हिन्दू देवी देवताओं के बारे में ऐसा बयान दे रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए यह गलत है। हम इसकी घोर निंदा करते है।

योगी जी संत समाज से है गौरक्ष पीठाधीश्वर है पहले वह संत महात्मा है उसके बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री है। वह मुख्यमंत्री सिर्फ पांच सालो के लिए है परन्तु संत आजीवन रहेंगे उन्हें यह सब कहना शोभा नहीं देता। भगवान शिव ने वानर योनि में जन्म लिया यह शास्त्रों में लिखा है। सीएम योगी के बयान से यह लगता है वह चाहते है की साधू संत भी दलितों की पार्टी बसपा में शामिल हो जाएँ क्योंकि जहां हनुमान जी है साधु-संत वही पर है।

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