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सुप्रीम कोर्ट ने ‘आर्टिकल 15’ को चुनौती देने वाली याचिका को किया खारिज

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(Image credits: Lehren)

सुप्रीम कोर्ट ने हिंदी फिल्म ‘आर्टिकल 15’ को चुनौती देने वाली ब्राम्हण समाज आफ इंडिया की याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता ‘ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया संस्था’ को कहा कि संबंधित फोरम में अर्जी दाखिल करें। अपनी याचिका में ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया संस्था ने कोर्ट से फिल्म पर रोक लगाने की मांग की है, हालांकि फिल्म रिलीज हो गई है।

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ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया संस्था की ओर से नेमिनाथ चतुर्वेदी ने याचिका दाखिल कर फिल्म का विरोध करते हुए कहा है कि फिल्म के जाति आधारित संवाद समाज में नफरत फैला सकते हैं। सच्ची आपराधिक घटना की पृष्ठभूमि बताते हुए फिल्म में झूठी, गलत और तोड़-मरोड़ कर कहानी पेश की गई है जिसके जाति आधारित संवाद आपत्तिजनक, अफवाह फैलाने वाले और समाज में नफरत पैदा करने वाले हैं।

याचिका में फिल्म के शीर्षक ‘आर्टिकल 15’ पर आपत्ति उठाते हुए कहा गया है कि इससे संविधान के आर्टिकल 15 के प्रति लोगों में गलत अवधारणा बनेगी. भारत सरकार की इजाजत के बगैर फिल्म का नाम ‘आर्टिकल 15’ नहीं रखा जा सकता।  याचिका में मांग की गई है कि फिल्म प्रमाणन बोर्ड को निर्देश दिया जाए कि वह फिल्म के प्रदर्शन का जारी प्रमाणपत्र निरस्त करे।  जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ब्राह्मण समाज की याचिका को ख़ारिज कर कहा की वह संबंधित फ़ोरम में इसके अर्जी दाखिल करे।

आयुष्मान खुराना की फिल्म आर्टिकल 15 ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर अभी तक अच्छी कमाई की है। फिल्म का बजट ज्यादा नहीं था और विषय भी अलग है इस कारण कम कलेक्शन की उम्मीद थी। लेकिन फिल्म ने सिनेमाघरों में शाहिद कपूर की कबीर सिंह के होते हुए भी अच्छा परफॉर्म किया है। रिलीज से आठवें दिन यानि शुक्रवार को फिल्म ने करीब 5 करोड़ और अपनी कमाई में जोड़ लिए हैं।

इस फिल्म पर कहीं कहीं बवाल भी हुआ. उपद्रव की आशंका को देखते हुए पुलिस की नजर में इस फिल्म की स्क्रीनिग शुरू की गई. कानपुर और पटना में इस फिल्म को लेकर विरोध की खबरें आईं। कानपुर में स्क्रीनिंग एक धार्मिक समूह के विरोध के बाद रोक दी गई. एक समूह ने सपना पैलेस थियेटर और इनोक्स मल्टीप्लेक्स में घुसकर फिल्म की स्क्रीनिग रुकवा दी। उन्होंने फिल्म निर्माता के खिलाफ नारेबाजी की और पोस्टर भी फाड़ डाले. ब्राह्मण समाज के द्वारा इस फिल्म को रुकवाने की भरपूर्ण कोशिश की गई थी जो अब असफल रही है और उल्टा उन्हें सुप्रीम कोर्ट से भी लताड़ ही मिली। 


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