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सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा से विवादित जमीन पर मालिकाना हक़ खोने की कही बात

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(image credits: the indian express)

जैसे जैसे अयोध्या मांमले में विवादित जमीन को लेकर सुनवाई हो रही है सुप्रीम कोर्ट भी नई नई बातें कहता दिख रहा है। दोनों ही पक्षों ने अपने दावे को शाबित करने के लिए भिन्न भिन्न तथ्त पेश किये। दरअसल गुरुवार को कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा से विवादित जमीन पर मालिकाना हक़ खोने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू संस्था से कहा कि अगर अखाडा भगवान राम लला का ‘शबैत’ (उपासक) होने का दावा करता हैं तो वह विवादित संपत्ति पर मालिकाना हक खो देगा।

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बता दें की इलाहबाद उच्च न्यायालय ने अपने 2010 के फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड़ की विवादित जमीन को तीन पक्षों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर-बराबर बांटने को कहा था। अखाड़ा ने अनंतकाल से विवादित स्थल पर भगवान ‘राम लला विराजमान का एकमात्र आधिकारिक ‘शबैत’ होने का दावा करते हुए कहा था कि वह वहां पर पूजा के लिये ‘पुरोहित’ नियुक्त करता रहा है।

वहीँ इस पर चीफ जस्टिस गोगोई के अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा , “जिस क्षण आप कहते हैं कि आप ‘शबैत’ (राम लला का भक्त)हैं, आपका (अखाड़ा) संपत्ति पर मालिकाना हक नहीं रह जाता है.” पीठ में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस ए नजीर भी शामिल हैं. न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने एकमात्र उपासक के तौर पर अखाड़ा की प्रकृति में भेद करते हुए कहा कि उसका विवादित जमीन पर मालिकाना हक नहीं रह जाता है. उन्होंने अखाड़ा के वकील सुशील कुमार जैन से कहा, “आपका संपत्ति पर एक तिहाई का दावा सीधे चला जाता है.”

उन्होंने जैन से पूछा कि आपने कैसे सवालों के घेरे में आई संपत्ति पर मालिकाना हक का दावा किया। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता ने जवाब देते हुए कहा, “नहीं, मेरा अधिकार समाप्त नहीं होता है. ‘शबैत’ होने के नाते संपत्ति पर मेरा कब्जा रहा है.”

उन्होंने हिंदू संस्था के दावे को सही ठहराते हुए कहा कि यद्यपि देवता को न्यायिक व्यक्ति बताया गया है, ‘शबैत’ को देवता की तरफ से मुकदमा करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है। ‘राम लला’ के वकील से उल्टा रुख अपनाते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता जैन ने कहा, “मूर्तियों को पक्षकार नहीं बनाया जाना चाहिये था.” पीठ ने पूछा, ‘क्या आप ‘शबैत’ होने के नाते संपत्ति पर कब्जे का दावा कर रहे हैं.” इसपर वकील ने सकारात्मक होते हुए कहा की, “मेरे शबैत होने की अर्जी पर किसी ने भी आपत्ति नहीं जताई है। सारी पूजा अखाड़ा द्वारा नियुक्त ‘पुजारी’ करा रहे हैं। जहां तक ‘शबैत’ के रूप में मेरे अधिकार का सवाल है तो उसपर कोई विवाद नहीं है.”


अयोध्या मामले में दोनों ही पक्ष अपने दावो को शाबित करने के लिए पूरजोर कोशिश कर रहे है। अब देखना यह होगा की कौन सा पक्ष मजबूती से अपने तथ्यों को सामने रखने में कामयाब होता है। बता दे की सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इस मुद्दे को आपसी बातो से सुलझाने का समय दिया था। लेकिन इसके बाद भी जब कोई परिणाम नहीं आया तो सुप्रीम कोर्ट खुद सुनवाई करके फैसले लेना पड़ रहा है।

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