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बीजेपी के पिछले कार्यकाल के दौरान से ही घर खरीदना हुआ मुश्किल, RBI के सर्वे में आया सामने

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(image credits: BW Businessworld)

मोदी सरकार द्वारा सभी देशवासियो को अपना घर लेने की लिए समर्थ बनाने वाले सपने की सच्चाई आसान नहीं दिखाई दे रही है। बल्कि पिछले चार वर्षों के बीजेपी के कार्यकाल के दौरान खरीदारों के लिए घर खरीदना काफी मुश्किल हो गया है।

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भारतीय रिजर्व बैंक के एक सर्वे में कहा गया है कि इस दौरान घर लोगों की पहुंच से दूर हुए हैं। देश के वित्तीय शहर माने जाने वाले मुंबई में घर खरीदारों की पहुंच से सबसे अधिक दूर हुए हैं। दरअसल रिजर्व बैंक जुलाई, 2010 से तिमाही आधार पर 13 शहरों में चुनिंदा बैंकों और आवास वित्त कंपनियों द्वारा दिए गए आवास ऋण पर आवासीय संपत्ति मूल्य निगरानी सर्वे (आरएपीएमएस) कर रहा है।

रिजर्व बैंक ने गुरुवार (11 जुलाई) को सर्वे जारी करते हुए कहा, ”पिछले चार साल में घर लोगों की पहुंच से दूर हुए हैं। इस दौरान आवास मूल्य से आय (एचपीटीआई) अनुपात मार्च, 2015 के 56.1 से बढ़कर मार्च, 2016 में 61.5 हो गया है। यानी आय की तुलना में मकानों की कीमत बढ़ी है। विभिन्न शहरों की बात की जाए, तो मुंबई में घर खरीदना सबसे मुश्किल और भुवनेश्वर में सबसे आसान है।”

RBI के सर्वे में स्पष्ट रूप से देखा गया है की कि इस 4 वर्षो के दौरान औसत ऋण से आय (एलटीआई) अनुपात भी मार्च, 2015 के 3 से मार्च, 2019 में 3.4 हो गया है जो घर के लोगों की पहुंच से दूर होने की पुष्टि करता है। सर्वे में कहा गया है कि औसत ऋण से मूल्य (एलटीवी) अनुपात 67.7 से 69.6 प्रतिशत हो गया है जो दर्शाता है कि बैंक अब अधिक जोखिम उठाने लगे हैं। एलटीवी से तात्पर्य आवास ऋण पर ऋण जोखिम से है।

इतना ही नहीं सर्वे में एक अन्य निष्कर्ष यह निकाला गया है कि औसत ईएमआई से आय (ईटीआई) अनुपात पिछले दो साल के दौरान कमोबेश स्थिर बना हुआ है। यह ऋण की पात्रता के बारे में बताता है।


बीजेपी सरकार के पिछले कार्यकाल में लोगो को आय की तुलना में घरो की महंगाई में अधिक बढ़ोतरी देखी गई। सरकार द्वारा बनाये गए गलत नीतियों और लिए गए निर्णय भी इसके पीछे जिम्मेदार हो सकते है। मालूम हो की पिछले कार्यकाल में नोटबंदी और GST जैसे निर्णय से भी देश के लोगो को काफी नुकसान उठाना पड़ा था।

RBI ने मुबंई समेत बाकी शहरो में भी सर्वे किया है, अन्य शहरों की तुलना में मुंबई, पुणे और अहमदाबाद ने अधिक ऊंचा औसत ईटीआई दर्ज किया। यह अध्ययन मुंबई, चेन्नई, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, पुणे, जयपुर, चंडीगढ़, अहमदाबाद, लखनऊ, भोपाल और भुवनेश्वर में किया गया।

देश में घरो की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर मौजूदा सरकार को कोई ठोस कदम उठाना चाहिए। हमे इतना तो मालूम है की बीजेपी सरकार न पिछले 5 साल के कार्यकाल को सिर्फ जुमलों में ही निकाल दिया। सरकार को 2022 तक सभी देशवासियो को घर देने से पहले, उनके आय में बढोत्तरी करने के बारे में विचार करना चाहिए। परन्तु अगर हम बीजेपी के पिछले कार्यकाल की तरफ देखे तो मोदी सरकार का यह सपना भी जुमले के तरह शाबित होगा।

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