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असम के BJP नेता का नाम NRC लिस्ट में शामिल नहीं, पूरा परिवार ‘विदेशी नागरिक’ घोषित

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(image credits: Northeast Now)

नागरिकता संशोधन विधेयक और एनआरसी जैसे कानून लाने वाली भाजपा के लिए अब यह कानून उनके ही एक नेता के लिए खुद भारी पड़ गया है। एनआरसी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच असम के एक वरिष्ठ भाजपा नेता पवन कुमार राठी को ‘विदेशी नागरिक’ घोषित कर दिया गया है। द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान से आने वाले 56 साल के पवन कुमार राठी को अपडेट किए जा रहे राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण एनआरसी के लिस्ट में नाम न होने के बाद ‘विदेशी’ घोषित किया गया।

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पवन का नाम जुलाई 2018 में प्रकाशित एनआरसी के लिस्ट में नहीं था, इसके बाद 26 जून को प्रकाशित हुई दूसरी सूची में भी उनका नाम शामिल नहीं था। इससे पहले भी गई बार इस सूचि में गड़बड़ी की वजह से कितने भी भारतीय नागरिको को विदेशी करार देकर कैंप में भेज दिया गया था। एनआरसी में लगातार कई खामिया भी सामने आती रही है इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट असम की बीजेपी सरकार को कई बार फटकार भी लगा चुका है। इस बीच एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया था । जहाँ भारतीय सेना में 32 साल काम कर चुके मोहम्मद सनाउल्लाह और उनके परिवार को ‘विदेशी’ करार देकर पुलिस कस्टडी में ले लिया गया था और बाद में कोर्ट की फटकार के बाद उन्हें छोड़ा गया।

एनआरसी की लिस्ट में नाम ना आने और विदेश नागरिक घोषित होने के बाद भाजपा के नेता पवन कुमार राठी ने बताया कि आज़ादी से पहले उनका परिवार राजस्थान के बीकानेर जिले से आकर दक्षिण असम के सिलचर में बसा था। उन्होंने बताया, ‘मैं चार भाई-बहनों में सबसे छोटा हूं, मेरा जन्म सिलचर में 1963 में हुआ था। ऐसे में एनआरसी अधिकारियों की तरफ से 1 जुलाई को मिला नोटिस चौंकाने वाला था.’ सिलचर में भाजपा के स्थानीय बूथ के अध्यक्ष पवन कुमार राठी पार्टी के टिकट पर स्थानीय चुनाव में खड़े हो चुके हैं। जब उनके परिवार को को उनके ‘विदेशी नागरिक’ घोषित होने का नोटिस मिला, तब वे दिल्ली में थे।

उन्होंने बताया, ‘मैं जितने मिल सके उतने दस्तावेजों की प्रतियां लेने बीकानेर के कालू में अपने पैतृक घर गया था, उन पर ग्राम पंचायत के से दस्तखत करवाए और लौटकर 5 जुलाई को स्थानीय एनआरसी ऑफिस में हुई सुनवाई में शामिल हुआ.’उनका कहना था कि पंचायत के सदस्य भी यह जानकर आश्चर्यचकित थे कि किसी मारवाड़ी को विदेशी कैसे घोषित किया जा सकता है. उन्होंने बताया, ‘ऐसा नहीं होना चाहिए था क्योंकि मैंने अपने पासपोर्ट, आधार कार्ड आदि समेत करीब 40 दस्तावेज दिए थे।

उनके परिवार के किसी भी सदस्य का नाम एक्सक्लूशन लिस्ट में नहीं आया है। सबको विदेशी घोषित कर दिया गया है। बता दें कि किसी व्यक्ति को विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा तब ही विदेशी घोषित किया जाता है, जब पुलिस की बॉर्डर विंग की ओर से उस व्यक्ति के विदेशी होने के संदेह का मामला दर्ज करवाया जाता है। दूसरी ओर एनआरसी अधिकारियों का कहना है कि ऐसा हो सकता है कि राजस्थान के अधिकारियों द्वारा समय पर दस्वावेज़ों को सत्यापित नहीं किया गया हो। देखना यह है की अब इस मामले में भाजपा सरकार क्या कदम उठाती है।


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