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RBI गवर्नर उर्जित पटेल के इस्तीफे की वजह आई सामने, समिति के सदस्य ने बताया यह कारण

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(image credits: hindustan times)

लगभग एक वर्ष पहले रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया RBI के गवर्नर उर्जित पटेल ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने इस्तीफे की वजह निजी कारण बताये थे। बता दे की उस दौरान RBI और केंद्र सरकार के बीच कुछ फैसलों को लेकर आपस में मतभेद भी बना हुआ था।

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वही अब उनके इस्तीफे को लेकर कुछ और वजह सामने आती दिख रही है। दरअसल गवर्नर उर्जित पटेल ने मोदी सरकार के साथ 1.76 लाख करोड़ के लाभांश और सरप्लस फंड के मुद्दे पर मतभेद के बाद इस्तीफा दिया था। वहीँ उर्जित पटेल के बाद डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने भी कुछ महीनो पहले इस्तीफ़ा दे दिया।  

उर्जित पटेल के इस्तीफे का दावा अतिरिक्त फंड का निर्धारण करने के लिए आरबीआई के पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता में छह सदस्यों वाली समिति में शामिल एक सदस्य ने किया है। कमेटी में पूर्व डिप्टी गर्वनर राकेश मोहन ने एनडीटीवी से बातचीत में यह बात कही। उनके इस दावे के साथ ही हम आरबीआई और सरकार के बीच फंड के मुद्दे पर चले आ रहे पुराने मतभेदों की यह पहली ‘आधिकारिक पुष्टि’ मान सकते है।

राकेश मोहन ने कहा कि, आपको याद होगा कि पूरा मामला आर्थिक सर्वेक्षण 2015-16 से सामने आया था, जिसमें मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा था कि आरबीआई के पास अधिक भंडार है। संख्या तीन लाख से नौ लाख करोड़ तक कुछ थी। यह वह संदर्भ था जिसमें समिति (बिमल जालान) का गठन किया गया था। इसके बाद ही पटेल ने अपने पद से इस्तीफा दिया था।’

आपको बता दे की सोमवार को RBI ने मौजूदा सरकार को लाभांश एवं अधिशेष के रूप में 1.76 लाख करोड़ देने का निर्णय लिया था।  इसमें 2018-19 के लिए 1,23,414 करोड़ रुपये का अधिशेष और 52,637 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्रावधान के रूप में चिन्हित किया गया है।  यह रकम आरबीआई की आर्थिक पूंजी से संबंधित संशोधित नियमों इकोनॉमिक कैप्टिल फ्रेमवर्क (ईसीएफ) के आधार पर निकाली गई है। केंद्रीय बैंक के इस इस फैसले से RBI के पूर्व गवर्नर रह चुके डी सुब्बाराव और वाई रेड्डी ने नाराजगी जताई थी। साथ ही उन्होंने इसे देश के लिए अच्छा नहीं बताया था। 


बताया जा रहा है की रिज़र्व बैंक के इस फैसले से वित्तीय घाटा बढ़ाये बिना ही मोदी सरकार को अर्थव्यवस्था को मंदी से उबारने मदद मिलेगी। लेकिन दूसरी ओर रिजर्व बैंक बोर्ड के इस फैसले की व्यापक आलोचना होती दिख रही है। इसको लेकर विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी सरकार पर निशाना साधा है। अब देखना यह होगा की बैंक द्वारा प्राप्त लाभाँश से मौजुदा सरकार अर्थव्यवस्था को गति देने में कामयाब हो भी पाएगी या नहीं। 

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