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कोर्ट ने जाति सूचक शब्दों पर रोक के लिए जारी किये यह नए आदेश, UGC ने विश्वविद्यालय को लिखा पत्र

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(image credits: zeenews)

जातिवाद आज कल लोगो के लिए एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। समाज में आज भी जाति के नाम पर आज भी लोगो से भेदभाव किया जाता है। आय दिन जाति से जुडी घटनाएं सामने आती रहती है। कभी किसी को गालियां दी जाति है तो कभी जातिसूचक शब्द कहे जाते है।

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अक्सर जातिसूचक शब्द इस्तेमाल करने के बाद मामला काफी गरमा जाता है। कॉलेजों से ज्यादातर ऐसे मामले सामने आये है जिनमे स्टूडेंट्स दूसरे स्टूडेंट्स को जातिसूचक शब्द बोल कर मज़ाक बनाते है।

इन्ही सब घटनाओ को देखते हुए कोर्ट ने इस मामले पर नया आदेश जारी किया है। किसी भी स्टूडेंट के द्वारा जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करने पर SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज होगा। कॉलेजअनुदान आयोग ने सभी 750 विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को पत्र लिखकर एंटी रैगिंग रेगुलेशन 2016 के नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। मुंबई में पिछले दिनों मेडिकल छात्रा के साथ हुई घटना के बाद जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने की बात सामने आई थी। इस मामले के बाद ने कोर्ट ने कड़ा एक्शन लेते हुए यह निर्देश जारी किये है।

प्रो. जैन के मुताबिक, आयोग के पिछले पत्रों में विश्वविद्यालयों और ऊँचे शिक्षण संस्थानों को एंटी रैगिंग रेगुलेशन नियम सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया था। एंटी रैगिंग रेगुलेशन 2009 को 2016 में संशोधित किया था। इसके तहत जातिसूचक के साथ-साथ क्षेत्र पर आधारित शब्दों का प्रयोग भी नहीं किया जा सकता है।

गौरतलब है कि UGC एंटी रैगिंग रेगुलेशन 2016 में बिहारी, हरियाणवी, मोटी, पतली व जाति आधारित जैसे शब्दों को भी रैगिंग की श्रेणी में शामिल कर लिया था। हालांकि इसके बावजूद बभी कई ऐसे कॉलेज थे जिनमे रैगिंग बंद नहीं हुई। सीनियर स्टूडेंट्स का नए स्टूडेंट्स के साथ रैगिंग करने कई खबरे सामने आयी थी।


आयोग ने संस्थानों और विश्वविद्यालयों से शैक्षणिक सत्र 2018-19 के तहत ऐसे मामलों की चार बिंदुओं पर SC, ST और OBC विद्यार्थियों की शिकायतों पर एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। इसमें विवि को बताना होगा कि पिछले रेगुलेशन के आधार पर कमेटी गठित, शिकायतों के लिए वेबसाइट पर विशेष पेज, रजिस्ट्रार के पास जाति सूचक शिकायतों पर निपटारा किया गया है या नहीं, एक वर्ष में कुल शिकायत, कितने मामलों का निपटारा, किसी फैकल्टी के खिलाफ भी शिकायत या कार्रवाई हुई या नहीं, विवि में कोई एंटी रैगिंग सेल है या नहीं, किस प्रकार से शिकायतों का निपटारा किया जाता है आदि पर रिपोर्ट देनी है।

UGC ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अपनी वेबसाइट पर एंटी रैगिंग या जातिसूचक शब्दों का प्रयोग न करने के आधार पर एक पेज करने को कहा। इसी पेज पर स्टूडेंट ऑनलाइन एंटी रैगिंग, जातिसूचक या क्षेत्र से जुडी शिकायत दे सकते हैं। इसके अलावा कुलपति, प्रिंसिपल या रजिस्ट्रार ऑफिस में भी सीधे शिकायत लेने का प्रावधान करना होगा। संस्थानों को अपनी फैकल्टी पर भी नजर रखी होगी। इसके अलावा ऐसे मामलों के निपटारे के लिए फैकल्टी सदस्यों की टीम बनाने को कहा है, जोकि ऐसी घटनाओं व गतिविधियों पर नजर रखेगी। यदि कोई फैकल्टी इस मामले में आरोपी हो तो भी उसके खिलाफ कार्रवाई करें।

कोर्ट के द्वारा दिए इन निरेडशॉ को जल्द से जल्द लागू किया जायेगा। देखना यह होगा की क्या इस आदेश के बाद भीं स्टूडेंट्स अपने व्यवहार को सुधार पाते है या फिर अपने से छोटे जाति के लोगो को बदनाम करेंगे।

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