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भाजपा नेता ने मंदी को लेकर दिया बचकाना बयान सुनकर चौक जायेंगे आप

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(image credits: patrika)

भाजपा राज में देश के आर्थिक विकास की गति धीमी हो चुकी है। मंदी का असर लगभग सभी सेक्टरों में पड़ता दिखाई दे रहा है। हाल ही में जारी हुए आंकड़ों के मुताबिक, पहली तिमाही में विकास दर 5.8 फीसदी से घटकर 5 फीसदी हो गई है। सरकार की तरफ से देश की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन बीजेपी के नेता इस मामले पर अजीबोगरीब बयान देने से बाज नहीं आ रहे हैं।

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इस मामले पर बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने अजीब दलील दी है। उन्होंने कहा है कि सावन-भादो में हर साल मंदी रहती है। भाजपा के नेताओ के लिए यह मंदी शायद एक मज़ाक के जैसा है वह इसके प्रभाव को शायद समझने की कोशिश ही नहीं कर रही की देश किस संकट की और बढ़ रहा है। 

बीजेपी नेता और बिहार के वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘केंद्र सरकार ने अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए 32 सूत्री राहत पैकेज की घोषणा और 10 छोटे बैंकों के विलय की पहल से कर्ज देने की क्षमता बढ़ाने जैसे जो चौतरफा उपाय किए हैं, उनका असर अगली तिमाही में महसूस किया जाएगा। वैसे तो हर साल सावन-भादो में मंदी रहती है।  बिहार के उपमुख्‍यमंत्री और वित्‍त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने आगे लिखा कि इस बार मंदी का शोर मचाकर कुछ लोग चुनावी पराजय की खीझ उतार रहे हैं।

उनका तर्क यह है की विपक्ष चुनाव में मिली हार का बदला लेने के लिए बस मंदी का शोर मचा रहे है उनके हिसाब से शायद भारत में कोई मंदी है ही नहीं बस विपक्ष बनाकर बयानबाज़ी कर रहा  है। इसके साथ ही सुशील मोदी ने दावा किया कि बिहार में मंदी का खास असर नहीं है, इसलिए वाहनों की बिक्री नहीं घटी।  केंद्र सरकार जल्द ही तीसरा पैकेज घोषित करने वाली है। 

हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह के मुताबिक,भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत काफी चिंताजनक है. उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की इस हालत के लिए नरेंद्र मोदी सरकार का गलत प्रबंधन जिम्मेदार है। मनमोहन सिंह ने 1 सितंबर को जारी बयान में कहा है, ”भारत इस स्थिति में ज्यादा समय नहीं रह सकता। इसलिए मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि वो बदले की राजनीति छोड़े और सभी बुद्धिजीवियों और विचारकों का सहयोग लेकर हमारी अर्थव्यवस्था को इस मानव-निर्मित संकट से बाहर निकाले.”


बता दें‍ कि आर्थिक सुस्ती से निपटने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कई योजनाओ की तैयारी में लगी है। केंद्र सरकार ने हाल ही में बैंकों के विलय की घोषणा की थी।  इसके साथ ही सरकार को भारतीय रिजर्व बैंक से 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपये मिले हैं, अब सरकार इन पैसे को जरिए ही भारत में आई मंदी पर नियंत्रण पाने के काम में लगी है।

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