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13 बैंक केंद्र सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में पहुंचे, अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाही

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(image credits: CNBC.com)

केंद्र में बीजेपी की सरकार है और इस केंद्र सरकार में कई बड़े बड़े घोटाले हो रहे है जिसके कारण बैंको को काफी नुक्सान भुगतना पड़ रहा है। केंद्र सरकार के रहते कई बड़े कारोबारी बैंको से हजारो करोड़ का लोन लेकर फरार हो गए। ऐसे में केंद्र सरकार पर बड़े सवाल उठाये गए। बीजेपी सरकार को भी इन सब का ज़िम्मेदार ठहराया गया। सभी जनता यह जानती है की बीजेपी बड़ी कंपनियों का साथ देती है। ऐसे ही हीरा कारोबारी नीरव मोदी भी केंद्र की सरकार होने पर PNB यानी पंजाब नेशनल बैंक से हजारो करोड़ का लोन लेकर भारत से फरार हो गया था। 

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ऐसे में बैंको पर बढ़ते बोझ को और भारी करते हुए केंद्र सरकार ने सर्विस टैक्स का एक और बोझ बैंको पर दाल दिया। ऐसे में बैंको ने केंद्र सरकार के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की सोची है।

इस बार सवाल सीधे सीधे केंद्र सरकार पर दागा गया है और बैंको ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। केंद्र सरकार के खिलाफ 13 बैंकों ने दिल्ली हाई कोर्ट का रास्ता पकड़ लिया है। कोर्ट के समक्ष सरकार की उस मांग का विरोध किया है जिसमें बैंकों से 38,000 करोड़ रुपये के सर्विस टैक्स की मांग की गई है। बैंकों का दावा है कि सरकार ने सर्विस टैक्स पर एक मनमाना निर्णय लिया है, जो बैंकों से उन पर लगाए गए जुर्माने को कई गुना करके संबंधित बैंकों के पास रखे गए खातों से वसूल किया जा रहा है।

इन बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यस बैंक, एचडीएफसी, हांगकांग और शंघाई जैसे बैंक शामिल हैं। बैंकों ने एकसाथ मिलकर केंद्र के खिलाफ याचिका दायर की है। न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति तलवंत  सिंह की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने सुनवाई के बाद केंद्र सरकार, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज, गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स काउंसिल और अन्य अथॉरिटीज को नोटिस जारी कर इस पर जवाब मांगा है।

बता दें कि सर्विस टैक्स ग्राहकों के बचत और चालू खातों में न्यूनतम औसत बैलेंस और न्यूनतम मासिक बैलेंस और औसत त्रैमासिक बैलेंस (एक्यूबी) में निर्धारित बैलेंस न रखने के लिए वसूला जा रहा है। याचिकाकर्ताओं ने इस फैसले को धारा 66 ई की संवैधानिकता का उल्लंघन करार दिया है। उन्होंने इसे “अस्पष्ट और मनमाना” फैसला करार देते हुए चुनौती दी है।


सरकार के इस फैसले से एचडीएफसी बैंक पर सबसे ज्यादा 18,000 करोड़ रुपए की पेनल्टी का बोझ बढ़ेगा। बैंकों का मानना है कि सरकार के इस फैसले से ग्राहकों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहे हैं। मालूम हो कि मद्रास हाई कोर्ट में भी इसी तरह की याचिका दायर की गई है। तीन बैंकों ने मिलकर मदुरई बेंच के समक्ष याचिका दायर की है।

सभी प्रकार के टैक्स को लेकर केंद्र सरकार पर अब सभी बैंक कड़ी कार्यवाही करने की तैयारी में है ऐसे में केंद्र सरकार की मुसीबते बढ़ सकती है। केंद्र में बीजेपी सरकार होने के चलते मोदी की मुसीबते भी बढ़ सकती है। लग रहा है की केंद्र सरकार द्वारा पास किये गए बिल अब उन्ही पर भारी पड़ने वाले है। 

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