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केरला के आईएएस अधिकारी ने दिया इस्तीफ़ा, कहा- जम्मू कश्मीर में अघोषित आपातकाल

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(image credits: hindi.asianetnews)

आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद घाटी में विपक्षी पार्टियों के नेताओं को प्रवेश न देने के कारन केंद्र सरकार आलोचना का सामना कर रही है। वही अब इसी संबंध में कुछ प्रशासनिक सेवा अधिकारी भी इसके खिलाफ बोलते हुए दिख रहे है। केरल से आईएएस अधिकारी गोपीनाथ मुंडे ने जम्मू कश्मीर में लगे आभासी आपातकाल के खिलाफ बोलने के लिए देश में सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया।

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उन्होंने कहा, ‘एक पूरे क्षेत्र में सभी तरह के प्रतिबंधों को लगाकर उसे पूरी तरह से बंद किए हुए पूरे 20 दिन हो चुके हैं. मैं इस पर चुप नहीं बैठ सकता हूं चाहे खुल कर बोलने की आजादी के लिए मुझे आईएएस से ही इस्तीफा क्यों न देना पड़े और मैं वही करने जा रहा हूं.’

आपको बता दे की, 2012 में आईएएस में शामिल होने वाले गोपीनाथन अरुणाचल-गोआ-मिजोरम-केंद्र शासित प्रदेश कैडर से जुड़े हुए हैं। ऐसा हो सकता है कि उन्हें जम्मू कश्मीर भेजा जा सकता था जिसे एक केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है। फिलहाल वह दादर एवं नागर हवेली सरकार के साथ जुड़े हुए थे परन्तु 21 अगस्त बुधवार को उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया।

गोपीनाथन ने आगे कहा, ‘मैं सार्वजनिक तौर पर तब तक कुछ नहीं कहना चाहता था जब तक कि मेरा इस्तीफा स्वीकार नहीं हो जाता है। हालाँकि यह बात तब लीक हो गई जब उनके साथियों ने यह सूचना केरल की मीडिया को बता दी जिनके साथ उन्होंने एक सोशल मीडिया ग्रुप में यह बात शेयर की थी.’

गोपीनाथ ने कश्मीर में आपतकाल जैसे स्थिति को देखते हुए भी मौजूदा सरकार पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने बताया, बाहरी संकट या सशस्त्र विद्रोह होने पर संविधान आपातकाल लगाने (और स्वतंत्रता को निलंबित करने) की अनुमति देता है,लेकिन कश्मीर में, लोगों की स्वतंत्रता को इस आधार पर रोक दिया गया है कि यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो आंतरिक गड़बड़ी हो सकती है. 44वें संशोधन के बाद किसी भी मामले में आंतरिक गड़बड़ी को आधार बनाते हुए आपातकाल नहीं लगाया जा सकता है.’


प्रशासनिक सेवा अधिकारी ने कहा, ‘निश्चित तौर पर आपातकाल की तरह यहां पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई. सब कुछ आईएएस अधिकारियों के कार्यकारी आदेशों पर छोड़ दिया गया है. इसके साथ ही नागरिकों के न्यायिक सहायता मांगने पर रोक भले ही न लगी हो लेकिन अदालतें उन पर कार्यवाही करने को उत्सुक नहीं दिख रही है.’

बता दें की गोपीनाथन खासतौर पर इस साल जनवरी में आईएएस से इस्तीफा देने वाले पूर्व आईएएस टॉपर शाह फैसल की गिरफ्तारी के तरीके को लेकर चिंतित हैं।

जब उनसे आईएएस छोड़ने के बाद उनकी योजना के बारे में पुछा गया तो, गोपीनाथन ने कहा, ‘मैंने इतनी दूर का नहीं सोचा है. लेकिन आज से बीस साल बाद अगर लोग मुझसे पूछेंगे कि जब देश के एक हिस्से में आभासी आपातकाल लगा दिया गया था तब आप क्या कर रहे थे तब कम से कम मैं यह कह सकूंगा कि मैंने आईएएस से इस्तीफा दे दिया था.’

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