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BJP राज में एक और IAS अधिकारी ने इस्तीफा दिया और कहा- लोकतंत्र खतरे में है

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(image credits: ibc24)

बीजेपी के सभी एक के बाद एक लिए गए फैसले से आम जनता ही नहीं बल्कि बड़े पदों पर बैठे अधिकारी भी परेशान है। जनता से लेकर सभी बड़े अधिकारी यह जानते है की देश संकट में है और लोकतंत्र भी। इसी सोच के साथ एक के बाद एक बड़े पदों पर बैठे अधिकारी अपना इस्तीफा दे रहे है। ऐसे ही एक कन्नड़ के डिप्टी कमिश्नर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

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जम्मू और कश्मीर के मुद्दे पर एक और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ने पद से इस्तीफा दे दिया है।  एस. शशिकांत सेंथिल ने बतौर IAS अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। दक्षिण कन्नड़ के डिप्टी कमिश्नर रहे शशिकांत ने कहा है कि ‘मुझे लगता है कि बतौर सिविल सर्वेंट के रूप काम जारी रखना अनैतिक है जब लोकतंत्र के बुनियादी निर्माण से अभूतपूर्व तरीके से समझौता किया जा रहा है।’

अंग्रेजी अखबार सियासत में छपी खबर के अनुसार सेंथिल ने कहा कि ‘आने वाले दिन राष्ट्र के मूल ताने-बाने में बेहद कठिन चुनौतियां पेश करेंगे। ऐसे में अपने काम को जारी रखने के लिए आईएएस से इस्तीफा देना ही बेहतर होगा।’

उन्होंने जून 2017 में दक्षिण कन्नड़ जिले के डिप्टी कमिश्नर का पदभार संभाला और जिले के सबसे सक्रिय डीसी में से एक के रूप में प्रतिष्ठित हुए. 40 वर्षीय श्री सेंथिल 2009 बैच के तमिलनाडु के रहने वाले हैं। उन्होंने भारतीदासन विश्वविद्यालय, तिरुचिरापल्ली के क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेज से प्रथम श्रेणी में बीई यानि इलेक्ट्रॉनिक्स सिलेबस में पास हुए।

सेंथिल ने 2009 और 2012 के बीच बेल्लारी में सहायक आयुक्त के रूप में कार्य किया और दो कार्यकालों के लिए शिवमोग्गा जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर रहे। वह चित्रदुर्ग और रायचूर जिलों के उपायुक्त भी थे। सेंथिल नवंबर 2016 से खान और भूविज्ञान विभाग में निदेशक थे।


बीते कुछदिनों पहले ही शशिकांत कैफ़े कॉफ़ी डे के संस्थापक वीजी सिद्धार्थ के मामले की जांच कर रहे थे । शशिकांत जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर इस्तीफा देने वाले दूसरे IAS हैं। इससे पहले गोपीनाथ कन्नन ने अपने पद से दिया था।  उन्होंने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि कश्मीर में लोगों को उनकी बात कहने का हक नहीं दिया जा रहा है।

यह साफ़ तौर पर देखा जा सकता है की बीजेपी के बड़े फैसले किस प्रकार से देश और देश के लोकतंत्र को खतरे में डाल रहे है। बीजेपी जहाँ लोकतंत की बात करती है वहीँ बीजेपी ही लोकतंत्र को ख़त्म करने में लगी है। इस्तीफा दे चुके बड़े अधिकारी भी यही मानते है की बीजेपी के इस राज में लोकतंत्र खतरे में है।  

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