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मोदी की मुद्रा योजना का बड़ा खुलासा, जाने कैसे लोगो को हुआ नुकसान

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(image credits: the financial express)

मोदी सरकार की मुद्रा योजना के तहत दावा किया गया था की इस योजना में लोगो को उनके नए रोजगार के लिए लोन दिया जायेगा। परन्तु ऐसा कुछ भी नही होता दिख रहा। मोदी की सभी योजनाओ के की तरह मुद्रा योजना भी विफल साबित हुई।

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केन्द्र सरकार अपनी महत्वकांक्षी मुद्रा योजना को देश में एन्टरप्रेन्योरशिप यानि उद्यमिता को बढ़ावा देने और रोजगार देने के मामले में काफी अहम मानती है। हालांकि श्रम मंत्रालय द्वारा किए गए एक हालिया सर्वे में खुलासा हुआ है कि बांटे गए लोन के मुकाबले देश में मुद्रा योजना से महज 10 प्रतिशत नौकरियां ही पैदा हो सकी हैं।

हालांकि यह रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार मुद्रा योजना के प्रत्येक पांच लाभार्थियों में से सिर्फ एक ने ही लोन की रकम से नया बिजनेस शुरू किया है। बाकी लाभार्थियों ने लोन की रकम को अपने पहले से ही शुरू किए गए बिजनेस को बढ़ाने में खर्च किया है।

द इंडियन एक्सप्रेस ने श्रम मंत्रालय की रिपोर्ट का अध्ययन किया है। जिसमें पता चला है कि इस सर्वे का नाम ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना सर्वे’ दिया गया है। श्रम मंत्रालय के अन्तर्गत आने वाले वाले लेबर ब्यूरो ने यह सर्वे किया है। सर्वे के अनुसार, अप्रैल-2015 से लेकर दिसंबर 2017 के बीच 1.12 करोड़ अतिरिक्त नौकरियां पैदा हुई। जिसमें से 51.06 लाख नौकरियां स्वरोजगार या गैर-भुगतान परिजनों से संबंधित हैं। वहीं 60.94 लाख सैलरी कर्मचारी हैं। इस तरह 33 महीने के दौरान जितना लोन मुद्रा योजना के तहत बांटा गया, उसके मुकाबले महज 10% नौकरियां उत्पन्न हुई।

सर्वे की ड्राफ्ट रिपोर्ट 27 मार्च, 2019 को तैयार की गई। सर्वे में बताया गया है कि अप्रैल-नवंबर 2018 के दौरान 97,000 लोगों को मुद्रा लोन योजना का लाभ मिला। मुद्रा योजना के तहत कुल 5.71 लाख करोड़ का लोन मुद्रा योजना की शिशु, किशोर और तरुण योजना के तहत बांटा गया है। इसमें से 12.27 करोड़ के लोन पहले तीन सालों में बांटे गए। बांटे गए लोन की औसत रकम 46,536 रही।


साल 2017-18 के दौरान बांटे गए लोन में से शिशुलोन का हिस्सा 42 प्रतिशत है। वहीं किशोर लोन का हिस्सा 34 प्रतिशत है। तरुण लोन जो 5 लाख से 10 लाख तक है उसकी हिस्सेदारी 24 प्रतिशत रही। वहीं उत्पन्न हुई नौकरियों में से 66 प्रतिशत नई नौकरियां छोटे लोन से ही पैदा हुई हैं। वहीं किशोर लोन ने 18.85 प्रतिशत 18.85% लोगों को नौकरियां दी हैं। तरुण लोन से 15.51% लोगों को रोजगार मिला है।

अतिरिक्त कृषि क्षेत्र में 22.77 लाख नौकरियां पैदा हुई हैं। वहीं मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर से इस दौरान सिर्फ 13.10 लाख ही नई नौकरियां पैदा हुई हैं। इतनी नौकरिया सभी लोगो के लिए काफी कम है। मुद्रा योजना के तहत भी लोगो को फायदा नहीं होता दिख रहा। हर वादे की तरह मोदी की मुद्रा योजना ने भी सिर्फ झूठे सपनो की बुनियाद रखी।

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