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क्या सच में मिल गए भगवान् राम के वंशज, आखिर क्या है सच्चाई, जानिए पूरी खबर

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(image credits: patrika)

राम वंशज मामले ने एक नया मोड़ पकड़ लिया है। सुप्रीम कोर्ट के राम वंशज वाले सवाल को लेकर एक के बाद एक लोग अपने आप को भगवान् राम का वंशज बताने में लगे है। पहले तो बीजेपी की सांसद दिया कुमारी ने खुद को भगवान् राम का वंशज बताया और अब मेवाड़ राजपरिवार भी इस मामले में शामिल होते हुए खुद को वंशज बताया है।

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दरअसल अयोध्या राम मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तय किया है की मामले की सुनवाई रोजाना होगी। इसी दौरान कोर्ट का सवाल था की, क्या अभी भी कोई भगवान् राम का वंशज है। इसी सवाल के जवाब में दिया कुमारी ने खुद को भगवान् राम का वंशज बताया था। और अब मेवाड़ का राज परिवार भी खुद को राम का वंशज बता रहे है। 

बप्पा रावल से मेवाड़ में सिसोदिया राज परिवार चला आ रहा है, जो सूर्यवंशी के रूप में जाना जाता है। मेवाड़ राज के चिन्ह में भी सूर्य देव शामिल हैं। पूरे मामले पर राज परिवार के सदस्य महाराणा महेन्द्र सिंह का कहना है कि उनका परिवार भगवान राम का ही वंशज है। इसकी जानकारी को तीन भागों में देखा जा सकता है। वर्तमान समय में मेवाड़ का अपना करीब 1400 वर्षो का इतिहास है। इसके साथ मध्य काल का एक इतिहास और इससे पुराना जो धार्मिक ग्रंथ है उनमें भी इसका जिक्र आता है। महेन्द्र सिंह का कहना है कि अभी तक न्यायालय ने उनसे किसी भी तरह के तथ्य नहीं मांगें हैं।

उनका कहना है कि अगर उनसे भगवान राम के वंशज होने के बारे में कोई भी जानकारी न्यायालय की ओर से मांगी जाएगी तो वे उसे जरूर दिखाएंगे । उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राम जन्म भूमि के विवाद का मामला उनकी वंशावली से कैसे हल होगा और इसका उपयोग किस तरह से किया जाएगा। यह भी जानना बेहद जरूरी है। वहीं महेन्द्र सिंह मेवाड़ के पुत्र कुंवर विश्वराज सिंह ने बताया कि मेवाड़ का अपने पुरखों से जो इतिहास सुना है, उसमें भी मेवाड़ राज परिवार को प्रभू श्रीराम का वंशज ही बताया गया है।

इससे पहले जयपुर के राजपरिवार ने कहा था कि वे भगवान राम के बड़े बेटे कुश के नाम पर ख्यात कच्छवाहा/कुशवाहा वंश के वंशज हैं और उनकी 310वीं पीढ़ी हैं। अगर सुप्रीम कोर्ट उनसे सबूत मांगता हैं तो वे कोर्ट को इसके दस्तावेज देने को तैयार हैं। पूर्व राजकुमारी दीयाकुमारी ने बताया था कि जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह भगवान राम के बड़े बेटे कुश के 289वें वंशज थे। 


उन्होंने कहा था कि उनके पास एक पत्रावली है, जिसमें भगवान श्रीराम के वंश के सभी पूर्वजों का नाम क्रमवार दर्ज हैं। साथ ही उनके पास 9 दस्तावेज, 2 नक्शे रखे हैं जो साबित करते हैं कि अयोध्या के जयसिंहपुरा और राम जन्मस्थान सवाई जयसिंह द्वितीय के अधीन ही थे। 1776 के एक हुक्म में लिखा था कि जयसिंहपुरा की भूमि कच्छवाहा के अधिकार में हैं। भगवान श्री राम के कुशवाहा वंश के 63वें वंशज थे। इसी तरह पूर्व राजकुमारी दीयाकुमारी भगवान श्री राम की 310वीं पीढ़ी है। 

पूर्व राजकुमारी दीया के अनुसार कच्छवाहा वंश के भगवान राम के बड़े बेटे कुश के नाम पर कुशवाहा वंश भी कहा जाता है। इसकी वंशावली के मुताबिक 62वें वंशज राजा दशरथ, 63वें वंशज श्री राम, 64वें वंशज कुश थे। 289वें वंशज आमेर-जयपुर के सवाई जयसिंह, ईश्वरी सिंह और सवाई माधो सिंह और पृथ्वी सिंह रहे. भवानी सिंह 307वें वंशज थे।

कौन भगवान् राम का वंशज है और नहीं इसका फैसला कोर्ट सबुत देखने के बाद ही करेगी। परन्तु यह मामला सुलझने की वजह और उलझता जा रहा है। किन तथ्यों पर भरोसा किया जाए और नहीं यह समझना मुश्किल है। 

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