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निर्वाचन आयोग ने क्लीन चिट पर चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की असहमति वाली रिपोर्ट का खुलासा करने से किया इनकार

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(image credits: india today)

चुनावी दौर में चुनाव आयोग पर कई तरह के आरोप लगाए गए, ऐसा लगा की बड़ी पार्टियां चुनाव आयोग को प्रभावित करने की कोशिश कर रही थी। जिस वजह से नियम तोड़ने पर भी चुनाव आयोग ने पार्टियों पर कोई कड़ा एक्शन नहीं लिया था।

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इस वजह से चुनाव आयोग की काफी किरकिरी हो रही थी। चुनावी माहौल में देश के पीएम नरेंद्र मोदी ने आचार सहिंता का नियम तोडा था जिसके चलते चुनाव आयोग ने मोदी को नोटिस जारी किया था। परन्तु चुनाव आयोग ने मोदी को क्लीन चिट दे दी थी लेकिन एक चुनाव आयुक्त ने क्लीन चिट पर असहमति जताई थी। असहमति जताने वाले अशोक लवासा थे जो मोदी को क्लीन चिट देने के खिलाफ थे।

मोदी को क्लीन चिट ना देने की बात पर निर्वाचन आयोग ने RTI अधिनियम के तहत लवासा की असहमति वाली रिपोर्ट मांगी है। परन्तु लवासा ने सुरक्षा की बात कहते हुए रिपोर्ट देने से मना कर दिया है।

निर्वाचन आयोग ने RTI अधिनियम के तहत चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की असहमति वाली रिपोर्ट का खुलासा करने से इनकार करते हुए कहा कि यह छूट-प्राप्त ऐसी सूचना है जिससे ”किसी व्यक्ति का जीवन या शारीरिक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। हाल में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भाषणों के जरिये आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाने वाली शिकायतों पर किये गए फैसलों पर लवासा ने असहमति जताई थी।

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, चुनाव आयोग ने पुणे के RTI कार्यकर्ता विहार दुर्वे की RTI का जवाब देते हुए यह बात कही। दुर्वे ने लवासा के असहमति जताने वाली रिपोर्ट की मांग की थी। ये वर्धा में एक अप्रैल, लातूर में नौ अप्रैल, पाटन और बाड़मेर में 21 अप्रैल तथा वाराणसी में 25 अप्रैल को हुई रैलियों में मोदी के भाषणों से संबंधित थे।


आयोग ने सूचना के खुलासे से छूट लेने के लिये RTI अधिनियम की धारा 8 (1) (जी) का हवाला दिया। इसके तहत वैसी सूचना का खुलासा करने से छूट हासिल है जो किसी भी व्यक्ति के जीवन या शारीरिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है।

दुर्वे ने इन भाषणों के संबंध में आयोग द्वारा उठाये गए कदम और आयोग द्वारा दिए गए निर्णय की जानकारी भी मांगी थी। इस सूचना को भी अधिनियम की धारा 8 (1) (जी) का हवाला देते हुए देने से मना कर दिया गया था। लवासा ने प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को उनके भाषणों के लिए आयोग द्वारा दी गई कई ‘क्लीन चिट पर कथित तौर पर असहमति जताई थी।

लवासा ने अपनी असहमति वाली रोपर्ट को चुनाव आयोग के आदेशों में दर्ज किये जाने की मांग की थी लेकिन ऐसा नहीं होने पर लवासा ने खुद को चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़े मामलों से खुद को अलग कर लिया था।

आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन के लिए मोदी और शाह के खिलाफ की गई शिकायतों में चुनाव आयोग के 11 निर्णयों पर लवासा ने कथित तौर पर असहमति जताई थी। इन निर्णयों में प्रधानमंत्री मोदी और शाह को क्लीन चिट दी गई थी।

शारीरिक खतरा बताते हुए लवासा की असहमति वाली रिपोर्ट को निर्वाचन आयोग ने सबके सामने लाने से मना कर दिया है। चुनाव आयोग में वह अकेले व्यक्ति थे जिन्होंने मोदी और अमित शाह को क्लीन चीट ना देने की बात कही थी। देखा जाए तो

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