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चुनाव आयोग का बड़ा ऐलान, कहा- बैलट पेपर हुआ पुराना, चुनाव EVM से होंगे

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(image credits: kalingatv)

चुनावी माहौल के शुरूआती दिनों से ही कई पार्टियों ने EVM के खिलाफ मोर्चा खोला था। और आज भी कई पार्टियां EVM के खिलाफ है। कई विपक्षी पार्टियों का मानना है की EVM में गड़बड़ी होने के चलते बीजेपी को जीत मिली। दूसरी और चुनाव आयोग इन बातो को मानने से इंकार करती रही।

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फिर से एक बार चुनाव आयोग ने अपना बयान जारी किया है जिसमे कहा गया है की चुनाव EVM मशीन से ही होंगे।

चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र के साथ हरियाणा और झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव में बैलेट पेपर के इस्तेमाल को खारिज किया है। इसके साथ ही आयोग ने कहा कि बैलेट पेपर अब ‘इतिहास’ हो गये हैं। उन्होंने ईवीएम का बचाव करते हुए कहा कि इन मशीनों से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। बता दें कि कांग्रेस और एनसीपी ने चुनाव में ईलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के इस्तेमाल को लेकर आपत्ति जताई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त यानि सीईसी सुनील अरोड़ा ने राज्यों में चुनाव तैयारियों की समीक्षा के बाद कहा कि विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों के चुनावी खर्च की सीमा में फिलहाल बदलाव नहीं हो सकता। जानकारी हो कि शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानि एनसीपी जैसी पार्टियों ने प्रति उम्मीदवार चुनावी खर्च की सीमा मौजूदा 28 लाख रूपये से बढ़ाने की मांग की थी।

सीईसी ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों में महाराष्ट्र के वामपंथी चरमपंथ से प्रभावित क्षेत्रों में अधिक केंद्रीय सशस्त्र बल तैनात किए जाएंगे। सुनील अरोड़ा ने कहा, ‘‘पार्टियां ईवीएम मुद्दे को उठाती रही हैं। हमने उन्हें प्यार और दृढ़ता से कहा है बैलेट पेपर अब इतिहास हो गये हैं और मैं आपसे कह सकता हूं कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ नहीं हो सकती है।


सीईसी ने आने वाले दिनों में त्योहार और चुनाव तारीख के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा, ‘‘किसी भी मामले में तारीखों पर फैसला करने में आयोग विभिन्न कारकों को ध्यान में रखता है जैसे कि छुट्टियां और स्कूल, बच्चों की परीक्षाएं, विभिन्न धर्मों के महत्वपूर्ण त्योहार. उन्होंने कहा कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा दिल्ली में की जाएगी। सुनील अरोड़ा ने कहा कि मतदान की तारीखें तय करने में केंद्रीय बलों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना एक महत्वपूर्ण कारक है।

विपक्षियों ने हमेशा ही बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की है। परन्तु बीजेपी सरकार और चुनाव आयोग दोनों ही बैलेट पेपर से चुनाव कराने के पक्ष में नहीं। ऐसे में विपक्षी पार्टियां अपनी पूरी कोशिश में है की EVM की जगह बैलेट पेपर से ही चुनाव हो।

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