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अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ने पर पूर्व पीएम ने पूछे ऐसे सवाल, वित्त मंत्री के उड़े होश

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(image credits: the hindu)

GDP और GST में भारी नुकसान होने के चलते अब केंद्र सरकार पर कई तरह के सवाल उठाये जा रहे है। देश में छा रही मंदी के चलते बड़ी कंपनियों और कारोबारियों को काफी घाटा झेलना पड़ रहा है। किसानो से लेकर सभी छोटे-बड़े कारोबारी इस मंदी से परेशान है। इस खस्ता हालत के चलते देश के पूर्व पीएम मनहोनाम सिंह ने भी अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कई सवाल उठाये परन्तु बीजेपी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण उसका जवाब नहीं दे सकी।

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अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ने के सवाल पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि मैं उद्योगों के प्रतिनिधियों से मिल रही हूं और उनसे जानकारी ले रही हूं, वे सरकार से क्या उम्मीद कर रहे हैं, और क्या चाहते हैं, इस पर उन्होंने सुझाव दिए हैं। इस दौरान सीतारमण ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब नहीं दिया।

यहाँ तक की सीतारमण ने नौकरियों के सवाल पर भी पल्ला झाड़ दिया। जहां लाखो लोगो की नौकरियां जा रही है वही नौकरी देने वाले मोदी के झूठे वादे सबको याद आने लगे है। बीजेपी सरकार रोजगार को लेकर कोई भी रिपोर्ट लोगो के सामने सार्वजानिक नहीं करना चाहती। 

नौकरियां छिनने के सवाल पर निर्मला सीतारमन ने कहा कि ज्यादातर जॉब्स असंगठित क्षेत्र में होती हैं और उनका डेटा नहीं है। बैंकों के विलय पर उन्होंने एसबीआई का अन्य बैंकों के साथ विलय का हवाला देते हुए कहा कि कर्मचारियों की कोई छंटनी नहीं होगी।

नौकरियां जाने की खबरों पर उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में अधिकतर नौकरियां अनौपचारिक क्षेत्र में पैदा होती हैं, जिसका कोई लेखा-जोखा नहीं होता है। उन्होंने कहा कि बजट के दौरान लिए गए कई सारे फैसलों के परिणाम दिखने लगे हैं।


सियासत में छपी खबर के अनुसार, वित्त मंत्री सीतारमन ने कहा कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना जारी रखेगी, लेकिन अन्य वाहनों की कीमत पर नहीं। उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर यानि GST में कटौती करने से संबंधित फैसला जीएसटी काउंसिल लेगा। 

सीतारमण का यह बयान दर्शाता है की वह देश की आर्थिक स्तिथि को लेकर जरा भी चिंतित नजर नहीं आ रही है। या फिर यह माना जा सकता है की उनकी हर कोशिश नाकाम साबित हो रही है। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने देश की इस हालत पर अपनी चिंता जाहिर की है। मोदी सरकार की लापरवाही और फैल्सलो ने देश को आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया है। 

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