fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
अन्य

अम्बानी के करीबी उद्योगपति अजय पीरामल ने कहा, सरकार और उद्योगपतियों के बीच बढ़ रहा अविश्वास

Industrialist-Ajay-Piramal,-close-to-Ambani,-said,-growing-distrust-between-the-government-and-industrialists
(image credits: timesnowhindi)

अभी हाल ही में ऑटो सेक्टर में आई मंदी के पीछे ऑटोमोबाइल कंपनियों ने मौजूदा सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सरकार द्वारा पिछले कार्यकाल में लिए गए कुछ निर्णयों को भी मंदी के लिए जिम्मेदार ठहराया। हालंकि प्रारंभ में सरकार ने मंदी से निजाद पाने के लिए कुछ कदम उठाये पर उसका खासा असर देखने को नहीं मिला।

Advertisement

वहीँ अब इन सबके बीच देश के एक उद्योगपति ने सरकार और उनके बीच अविश्वास बढ़ने की बात कही है। जाने माने कारोबारी अजय पीरामल ने कारोबारियों के खिलाफ सरकारी एजेंसियों की ओर से छापेमारी और लुकआउट नोटिस जारी किए जाने के मामलों की रफ्तार बढ़ने की आलोचना की है। शुक्रवार को उन्होने कहा इससे कारोबारी समुदाय के मन में अविश्वास बढ़ रहा है।

अजय पीरामल ने यह बात ऐसे समय में की है जब एलएंडटी के ए . एम . नाइक समेत अन्य कारोबारी भी चिंता जता चुके हैं। हालांकि , कॉरपोरेट कर में कटौती से कारोबार को लेकर उद्योग जगत में आशा बढ़ी है। पीरामल ने यह टिपण्णी उस दौरान की है जब नियामक और जांच एजेंसियों ने जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल को विदेश जाने से रोका और वीडियोकॉन समूह के प्रवर्तकों पर छापे आदि की कार्रवाई की।

पिरामल ने वर्ल्ड हिंदू इकोनॉमिक फोरम में कहा, “आज मैं देख रहा हूं कि सत्ता में बैठे लोग और पूंजी सृजनकर्ताओं (कारोबारी एवं निवेशकों) के बीच अविश्वास बढ़ रहा है, दूरियां आ रही हैं।”

उन्होंने जोर देकर कहा, “यदि आप पर कोई अपराध करने का आरोप है तो क्या जरूरत है कि उसे अपराधी ठहराया जाए या अपराधीकरण किया जाए? जब पहले से ही काफी सूचनाएं उपलब्ध हैं, आंकड़े उपलब्ध हैं, तो क्या छापेमारी की जरूरत है? लुकआउट नोटिस जारी करने की जरूरत है? यह किसी भी कारोबारी के लिए सकारात्मक संकेत नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “जो महत्वपूर्ण है वह यह है कि धन-सृजन करने वालों को वह सम्मान मिले, जिसके वे हकदार हैं।” पीरामल ने कहा मौजूदा समय में नकदी संकट भी देश के लिए चुनौती है।


पिरामल ने कहा कि पूंजी की उपलब्धता एक ऐसी बड़ी चुनौती है, जिसका सामना देश को करना पड़ रहा है। ऊंची ब्याज दरें भी एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि यह निर्यात में प्रतिस्पर्धा को खत्म कर देता है।

आपको बता दे पीरामल का बयान तब आया है जब ऑटोमोबाइल और एफएमसीजी सेक्टरों को डिमांड में कमी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। इसके साथ ही नए निवेशकों ने भी भारतीय बाजार से किनारा कर लिया है। जिसके कारन भी अर्थव्यवस्था को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसको देखते हुए सरकार ने कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती तो की है लेकिन इसके कारन सरकार को 1.45 लाख करोड़ का नुकसान होने वाला है। यह भी चिंता का विषय बना हुआ है।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved