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मालेगांव ब्लास्ट में बढ़ सकती है साध्वी प्रज्ञा की मुश्किलें, गवाह ने अदालत में सबूतों की करी पहचान

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(image credits: India Today)

मालेगांव की घटना में आरोपी साध्वी प्रज्ञा की मुश्किलें बढ़ना शुरू हो गई है। इस घटना में कथित रूप से इस्तेमाल हुई मोटरबाइक एलएमएल फ्रीडम को कोर्ट में सोमवार को ट्रायल कोर्ट में पहली बार लाया गया। यह मोटरसाइकिल प्रज्ञा सिंह ठाकुर के नाम पर रजिस्टर्ड है। बता दें की लोकसभा चुनाव 2019 में भोपाल से निर्वाचित सांसद प्रज्ञा अभी जमानत पर हैं। मोटरसाइकिल घटनास्थल पर क्षतिग्रस्त अवस्था में मिली थी।

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मौके पर पंचनामा करने वाले गवाह ने दो मोटरसाइकिलों की पहचान कर लिया है । इनमें एक एलएमएल है जबकि दूसरी होंडा यूनिकॉर्न मोटरसाइकिल। गवाह को सोमवार को इन मोटरसाइकिलों के अलावा पांच साइकिलें भी दिखाई गईं। उनके अनुसार, ये वही बाइक और साइकिलें हैं जो उसने 2008 में घटनास्थल पर देखी थी।

बता दें कि ट्रायल में सबूत के तौर पर इस्तेमाल हो रहे दो बाइक और पांच साइकिलों को मालेगांव के भीखू चौक से बरामद किया गया था। फोरेंसिंक साइंस लैबोरेट्री द्वारा इनकी जांच करने के बाद में इन्हें महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) के पास भेज दिया गया। एटीएस ने ही पहले इस मामले की जांच की थी। मुंबई की अदालत में जगह की कमी होने के कारण इन मोटरसाइकिलों को एटीएस के कलाचौकी यूनिट भेजा गया था।

सोमवार को इन सबूतों को एक टेंपो में लादकर अदालत में लाया गया। साइकिल और मोटरसाइकिलों को पांचवें तल पर स्थित कोर्ट रूम तक नहीं लाया जा सका। कोर्ट ने अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों को निर्देश दिया कि वह ग्राउंड फ्लोर पर जाकर इन सबूतों को देखें। स्पेशल जज वीएस पदलकर ने भी इन सबूतों का मुआयना किया।

पहले गवाहों को जूट के बैग में बंधी जंग खा चुकी साइकिलों को दिखाया गया।इसके बाद उसे एलएमएल फ्रीडम की पहचान करने को कहा गया। गवाह ने टेंपो पर चढ़कर मोटरसाइकिल की पहचान की। जज भी मोटरसाइकिल का मुआयना करने के लिए टेंपो पर चढ़े। मुआयने के बाद सभी कोर्ट रूम में वापस आ गए।


पिछले माह गवाह ने बताया था कि पुलिस ने उसे जो एलएमएल मोटरसाइकिल दिखाई थी, उसका रजिस्ट्रेशन नंबर MH 15 P 4572 था। अक्टूबर 2008 में हुए इस घटना के मामले में पहली गिरफ्तारी बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर की हुई थी। साध्वी प्रज्ञा की यह गिरफ्तारी बाइक के रजिस्ट्रेशन के आधार पर की गई थी।

इस मामले में एटीएस के बाद मामले की जांच कर रही एनआईए ने 2016 में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर कहा था कि प्रज्ञा उस बाइक को दो साल से ज्यादा वक्त से इस्तेमाल नहीं कर रही थीं। फिर इसके बाद एनआईए ने प्रज्ञा को क्लीनचिट दी थी। हालांकि, अदालत ने एनआईए के दावे को खारिज कर दिया और कहा था कि आरटीओ के रिकॉर्ड में बाइक प्रज्ञा के नाम पर रजिस्टर्ड है और यह ट्रायल का मामला है कि उस घटना में इसके इस्तेमाल से प्रज्ञा का कनेक्शन है या नहीं?

अब देखना यह होगा की मौजूदा सरकार साध्वी के खिलाफ बढ़ने वाली मुस्किलो को किस तरह सामना करती है। क्या बीजेपी उन्हें अनदेखा कर देगी? या हम यह कहे की बीजेपी अपने सांसद का बचाव करने की कोशिश भी कर सकती है।

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