fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
अन्य

मोदी सरकार के इस फैसले पर वैज्ञानिकों ने उठाए सवाल, दिया यह बयान

Scientists-raised-questions -on-this-decision-of-Modi-government,-gave-this-statement
(image credits: blog.nurserylive)

केंद्र की बीजेपी सरकार ने कृषि क्षेत्र में उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए जीरो बजट फार्मिग तो लेकर आई, परन्तु उनके द्वारा लाया गया यह आईडिया कृषि से संबधित लोगो ने नकार दिया है। दरअसल कृषि वैज्ञानिकों ने इस पहल पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही उन्होंने इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा है।

Advertisement

इस चिट्ठी में कहा गया है कि ‘अप्रमाणित’ तकनीक के जरिए ‘जीरो बजट खेती’ से न तो किसानों को फायदा होगा और नहीं ही उपभोक्ताओं को। राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (एनएएसएस) के अध्यक्ष पंजाब सिंह ने कहा है कि ‘केंद्र को जीरो बजट खेती को बढ़ावा देने के लिए पूंजी और मानव संसाधनों का अनावश्यक निवेश नहीं करना चाहिए। हमने इस संबंध में पीएम मोदी को लिखित में अपने सुझाव दे दिए हैं जिसमें कृषि वैज्ञानिकों के विचारों को साझा किया गया है।’

इससे पता चलता है की मौजूदा सरकार न कृषि को बढ़ावा देने के लिए पहल तो किया, लेकिन इससे पूर्व इससे संबधित सभी विषयो को जानकर लोगो के साथ चर्चा करना भूल गई। सरकार को कोई भी योजना लाने से पहले उस क्षेत्र से जुड़े एक्सपर्ट लोगो की सलाह लेने की आवश्यकता है। देखा जाये तो ज्यादातर मामलों में मौजूदा सरकार में विशेषज्ञयों से सलाह लेने का प्रचलन ही नहीं है।

अब हम आपको जीरो बजट फार्मिंग के बारे में बता देते हैं, दरअसल यह खेती पूरी तरह से प्राकृतिक तरीके पर निर्भर करती है। खेती के लिए जरूरी खाद-पानी और बीज आदि का इंतजाम प्राकृतिक रूप से ही किया जाता है। इसमें केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता। हलाकि बिना केमिकल इस्तेमाल किये प्राप्त किये गए फसलों की मार्केट में ठीक ठाक दाम मिल जाते है। इसमें लागत और मेहनत कम होने के कारन इसे जीरो बजट फार्मिग कहा गया है।

आपको बता दे कि बजट के दौरान निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में जीरो बजट खेती पर जोर दिया था। उन्होंने इसे किसानों की आय दोगुना करने की दिशा मे एक अहम कदम बताया था। नई दिल्ली स्थित एनएएसएस कृषि वैज्ञानिकों का सगंठन है। इस संगठन ने पिछले महीने ही जीरो बजट खेती पर मंथन के लिए बैठक बुलाई थी। इसमें कई अन्य संगठनों के भी डायरेक्टर शामिल हुए थे। जिनमें इंडियन काउंसिल एग्रीकल्चर रिसर्च (आईसीएआर) त्रिलोचन मोहपात्रा और नीति आयोग के सदस्य रमे चंद भी शामिल हुए थे।


एनएएसएस के अध्यक्ष के मुताबित पीएम तक अपनी बात पहुंचाने में लगभग 75 विशेषज्ञ शामिल हैं। इन लोगो में वैज्ञानिक, नीति निर्माता, प्रगतिशील किसान, गैर सरकारी संगठन और उर्वरक, बीज और फसल सुरक्षा रसायन उद्योग के प्रतिनिधि हैं।

यहां गौर करने वाली बात यह भी है की वह कौन से तरीके है जिन्हे मौजूदा सरकार कृषि वैज्ञानिकों से बेहतर जानती है। और जीरो बजट फार्मिंग से लाभ होने की बात कर रही है। खैर अब देखना यह होगा की कृषि वैज्ञानिकों द्वारा लिखे गए पत्रों को सरकार संज्ञान में लेती है या अर्थव्यवस्था की ही तरह विशेष्यज्ञों की राय को सरकार अनसुना कर देगी।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved