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सुप्रीम कोर्ट ने देश में समान नागरिकता को लेकर दिया सबसे बड़ा बयान, जानिये क्या कहा

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(image credits: dna india)

बीजेपी सरकार के वापस सत्ता में आने से कई लोग खुश तो है परन्तु अधिकतर जनता नाखुश है। सभी लोग यह जानते है की देश कितनी असमानता फ़ैल चुकी है। बीजेपी सरकार जिस मुद्दे को लेकर वापस सत्ता में आई अब वही मुद्दा धुल के बराबर हो गया है। यही नहीं बीजेपी पार्टी में भी असमानता देखी जा सकती है।

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बीजेपी के लोग अपने ही पार्टी के लोगो को समान रूप से नहीं देखते तो वह देश के लोगो को कैसे देखेंगे। आजकल भारत में जाति हो या धर्म किसी को भी समान रूप से नहीं देख जा जाता। इसी बात को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपना बयान जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा है कि देश में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए अब तक कोई प्रयास नहीं किया गया। जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने एक मामले के फैसले में ये टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने कहा, देश में गोवा इसका शानदार उदाहरण है, जहां धर्म से परे जाकर समान नागरिक संहिता लागू है। यह तब है जब शीर्ष अदालत ने ही तीन मामलों में साफ तौर पर इसकी हिमायत की थी।

जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा, गोवा एकमात्र ऐसा राज्य है जहां कुछ सीमित अधिकारों के संरक्षण को छोड़कर समान नागरिक संहिता सभी नागरिकों पर लागू होता है। संविधान निर्माताओं ने राज्य के नीति निर्देशक तत्वों पर विचार करते हुए अनुच्छेद-44 के जरिए यह आशा और उम्मीद जताई थी कि राज्य, सभी नागरिकों के लिए पूरे भारत वर्ष में समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करें। हालांकि, अब तक इस बारे में कोई कदम नहीं उठाया गया।

हिंदू कानून तो 1956 में वजूद में आया, लेकिन देश के सभी नागरिकों पर समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। पीठ ने यह भी कहा, 1985 में मोहम्मद अहमद खान बनाम शाह बानो मामला, 1995 में सरला मुद्गल व अन्य बनाम भारत सरकार मामला और 2003 में जॉन वेल्लामैटम बनाम भारत संघ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने समान नागरिक संहिता की हिमायत की थी, लेकिन अब तक इसे लेकर कोई प्रयास नहीं किया गया।


शीर्ष अदालत ने ये टिप्पणी गोवा से बाहर रहने वाले गोवा के निवासियों की संपत्तियों के उत्तराधिकार विवाद के एक मामले का निपटारा करते हुए की। पीठ जोस पाउलो कौटिन्हो बनाम मारिया लिजा वैलींटना परेरा के मामले की सुनवाई कर रही थी।

बीजेपी सभी धर्म, जाति को मानने की बात तो करती है परन्तु ऐसा होता नहीं। आज लोगो के बिच असमानता की दिवार खड़ी है जिसे गिरना मुश्किल है। 

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