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सुप्रीम कोर्ट का रविदास मंदिर गिराने पर आदेश, माहौल बिगाड़ने वाले पर हो सख्त कार्रवाई

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(image credits: hindustan times)

कुछ दिनों पहले देश की राजधानी नई दिल्ली के तुगलकाबाद एक्सटेंशन में स्थित रविदास मंदिर तोड़ने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ बहुत लोगो ने प्रदर्शन किया। बता दें की यह मंदिर खास समाज के लोगो की भावनाओ से जुड़ा है। दरअसल जिस जगह पर यह मंदिर स्थित था, उस जमीन पर DDA दिल्ली डेवेलपलमेंट अथॉरिटी अपना दावा कर रही है।

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देशभर में करीब एक से अनेक राज्यों में लोग कोर्ट के आदेश के खिलाफ आगे आये और इसकी निंदा की। वही पंजाब के कई हिस्से में लोगो ने मंदिर तोड़े जाने पर दिल्ली सरकार और सुप्रीम कोर्ट का विरोध किया।

दरअसल जमीन DDA दिल्ली डेवेलपलमेंट अथॉरिटी के अंतर्गत होने की वजह से ही यह मामला विवादित बना हुआ है। पहले भी निचली अदालत पर इस विवादित जमीन को लेकर कई मुकदमे चले लेकिन कोई फैसला नहीं आ पाया। वहीं जब मामला सुप्रीम कोर्ट पंहुचा तो अदालत ने तुरंत ही विवादित जमीन पर मंदिर तोड़ने के आदेश दे दिए। और इसके बाद से एक खास समाज के लोग इसको लेकर कोर्ट और दिल्ली सरकार की आलोचना कर रहे है।

वही देश के अनेको राज्यों में इस मंदिर को तोड़े जाने पर विरोध को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की तरफ एक बयान सामने आया है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली सरकार को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में रविदास मंदिर को ध्वस्त किए जाने वाले हमारे आदेशों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश न की जाए, जो लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीन राज्यों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए जाएं। कोर्ट ने यह भी कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए नेताओं की ओर से अदालत के आदेश का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।


सुप्रीम कोर्ट द्वारा लोगो के विरोध को लेकर इस प्रकार का बयान देना उचित नहीं लगता है। कहीं न कहीं कोर्ट को लोगो के विरोध को समझना चाहिए। और इसके साथ ही कोर्ट को अपने फैसले पर दुबारा से विचार करने की जरूरत है। यहां देखने वाली बात यह है की मंदिर को लेकर किये जा रहे विरोध में, अभी तक हमें तो कोई राजनीतिक रंग नहीं दिखा है।

ऐसा लगता है की कभी कभी सुप्रीम कोर्ट किसी किसी मामले में निर्णय लेते वक्त जल्दबाजी दिखाने की कोशिश करता है, जो की सही नहीं है। इसके साथ ही देश का कोई भी नागरिक देश के इतने बड़े संस्थान से इस प्रकार निर्णय लेने की उम्मीद नहीं करता है।

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