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केंद्र सरकार ने जताया आपत्ति तो जस्टिस अकील कुरैशी पर सुप्रीम कोर्ट ने की यह सिफारिश

(image credits: bar and bench)

गुजरात हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज अकील कुरैशी जिससे केंद्र सरकार ने आपत्ति जताई थी , आखिर में उनके नियुक्ति पर कोलेजियम ने अपनी सिफारिश बदल ली है। बता दें की इससे पूर्व कॉलेजियम ने उन्हें मध्यप्रदेश में हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की थी। लेकिन केंद्र द्वारा इस फैसले पर नाराजगी जताने के बाद सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम को अपना फैसला बदलना पड़ रहा है।

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मौजूदा सरकार द्वारा नाराजगी जताने के बाद अकील कुरैशी को मध्यप्रदेश की जगह अब त्रिपुरा हाईकोर्ट का न्यायधीश बनाने की सिफारिश की गई। आपको बता दें की जस्टिस अकील गुजरात हाईकोर्ट में सीनियर न्यायाधीशों में से एक हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी नहीं दी थी और 7 जून को जारी एक अधिसूचना में जस्टिस रवि शंकर झा को कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बनाने की घोषणा कर दी गई।

देखा जाये तो केंद्र सरकार की तरफ से दिखाई गई नाराजगी के कारण सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को अपना निर्णय बदलना पड़ा है। मौजूदा सरकार द्वारा कॉलेजियम के निर्णय के प्रभावित करने की कोशिश करना उचित नहीं है।

इसके पश्चात उच्चतम न्यायलय ने कहा की, उसे कानून और विधि मंत्रालय की ओर से जस्टिस कुरैशी के पदोन्नति के बारे में संवाद हुआ है। शुक्रवार की रात सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट में अपलोड किए गए एक प्रस्ताव में कोलेजियम ने कहा, ‘ 23 अगस्त और 27 अगस्त को हुए विचार-विमर्श और संलग्न दस्तावेजों को ध्यान में रखते हुए कोलजियम अपने 10 मई के प्रस्ताव में संशोधन करता है कि जस्टिस अकील कुरैशी को त्रिपुरा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की जाती है’.

यहाँ आपका एक बात जानना जरुरी है की मध्यप्रदेश का हाईकोर्ट देश में सबसे बड़े हाईकोर्ट में से एक है जबकि त्रिपुरा हाईकोर्ट सबसे छोटा। इस मामले में बीते महीने गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन ने न्यायापालिका की स्वतंत्रता के हनन का आरोप लगाया। एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अकील कुरेषी की नियुक्ति में हो रही देरी का भी मुद्दा उठाया।


इसके साथ हो याचिका में आरोप लगाया गया की, 10 मई को कोलेजियम की ओर से की गई सिफारिश में 10 अत्तिरिक्त जजों की विभिन्न हाईकोर्टों में नियुक्ति पर केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी गई। लेकिन जस्टिस अकील की नियुक्ति को लटका दिया गया।

मौजूदा सरकार धीरे धीरे न्यायपालिका को पूरी तरह से प्रभावित करना चाहती है। अक्सर विपक्षी पार्टिया भी केंद्र सरकार पर ऐसा करने के आरोप लगाती है। सरकार द्वारा न्यायपालिका द्वारा निर्णय लेने के तरीके पर नाराजगी जताकर उसे प्रभावित करना बिलकुल भी उचित नहीं है।

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