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पुलिस के निगरानी में करनी पड़ी दलित कांस्टेबल की शादी, सवर्णो ने इस्तेमाल किया जातिसूचक शब्द

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(Image Credits: The Indian Express)

पुलिस वालो की निगरानी में दलितों की शादी का मामला तो कई बार आया है परन्तु इस बार कांस्टेबल की शादी ही पुलिस की निगरानी में हुई है। जी हां मामला बालेसर के थाना दुगर गाँव का है जहाँ शनिवार शाम बारात लेकर पहुंचे पुलिस कांस्टेबल जो की दलित था कुछ लोगो ने उसका रास्ता रोका। उसको रोक कर अपमानित किया गया और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग भी किया गया।

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इस मामले के चलते रविवार को बालेसर पुलिस ने फुर्ती दिखते हुए कार्यवाही की और 7 लोगो को गिरफ्तार किया। जिस देश में दलित पुलिस वाला अपनी बारात नहीं निकाल सकता वहा किसी आम दलित के साथ कैसे होता होगा यह आप सोच ही सकते है।

जिला जोधपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक की ओर से जारी बयान में बताया कि दूल्हे सवाईराम की ओर से 10 असामाजिक लोगो के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

इस घटना की गंभीरता और कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए CO बालेसर अजीतसिंह उदावत के निर्देशन में देचू थाना अधिकारी दीपसिंह, बालेसर थाने के ASI धन्नाराम व हेड कांस्टेबल परबतसिंह के देख रेख में टीम बनायी गयी । घटना के महज 12 घंटे के भीतर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनसे पूछताछ की जा रही है।

पुलिस ने गांव में मजूद लोगों को बुलाया और दोनों पक्षों से बात की व समझाया भी । पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लेते हुए मौके पर ही दूल्हे के साथ बारातियों का भी बयान रिकार्ड किया। पुलिस ने मौके पर शांति बनाये रखी थी और पुलिस की ही निगरानी में बरात निकली गई।


शनिवार आधी रात को दूल्हे ने मामला दर्ज कराने के बाद दूल्हा और बाराती थाने से दूगर गांव आए। पुलिस के पहरे में रविवार सुबह पांच बजे विवाह की रस्में निभाई गई। दूल्हा-दुल्हन ने शादी के फेरे लिए और रविवार दिन में भी विवाह की सारी रस्में पुलिस की मौजुदिगी में पूरी की गयी हुई और बारात को सुरक्षा से रवाना किया गया।

रविवार को बालेसर उपविभाग के अधिकारी रोहित कुमार दूगर गांव पहुंचे और घटना की जानकारी ली। वहीं पुलिस कांस्टेबल दलित दूल्हे के साथ हुई इस घटना को लेकर मेघवाल समाज शेरगढ व बालेसर के मौजूद लोगों ने उपविभाग अधिकारी से ज्ञापन देकर आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की है।

अब बात यहाँ तक आ पहुंची है की व्यक्ति पुलिस कांस्टेबल हो या आम आमदी अगर दलित है तो शादी नहीं होने देंगे। देखना यह है की दलितों की शादी में हो रहे इस तरह की घटना कब तक चलती रहेगी, और कब बहुजन समाज एक होकर अपने ऊपर होने वाले इन अत्याचारों के लिए आवाज़ उठाएगा।

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