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पाॅपुलर फ्रंट आफ इंडिया (रूढिवादी इस्लामिक समुदाय) ने गाय की राजनीति को संघ परिवार का हथियार बताया

(Image Credits: TwoCircles.net)

हाल ही में कांग्रेस शासित राज्य मध्य प्रदेश में कथित रूप से गाय की हत्या का मामला सामने आया था। जिसके बाद गौ हत्या के 2 आरोपियों पर राज्य के कमल नाथ सरकार ने रासूक लगा दिया था। जिसको लेकर सोशल मीडिया पर लोगो सहित कई बड़े पत्रकारों ने कांग्रेस पर कई सवाल उठाये थे। इसी तरह जस्टिस काटजू ने भी गौ हत्या के मामले में कांग्रेस द्वारा राष्ट्रद्रोह का कानून लगाने को गलत बताया था।

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दरअसल यह मामला अभी पूरी तरह से शांत नहीं हुआ है। पाॅपुलर फ्रंट आफ इंडिया (रूढिवादी इस्लामिक समुदाय) की केंद्रीय सचिवालय की बैठक में मध्यप्रदेश में होने वाले इस घटना पर सख्त बेचैनी और नाराज़गी जताई। बैठक में कहा की कांग्रेस सरकार द्वारा गोकशी और गौतस्करी के आरोप में कुछ मुसलमानों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा एक्ट (NSA) जैसे कठोर कानून का इस्तेमाल कर लिया जाता है।

साथ इस बैठक ने गाय को राजनीति संघ परिवार का हथियार बताया और कहा की वे इसका इस्तेमाल करके हिंदू भावनाओं को अपनी ओर करने की कोशिश करते हैं। आज गाय की राजनीति के कारण ही गौरक्षा जैसी एक भयावह स्थिति को बढ़ावा दिया जा रहा है।

गौ रक्षा के नाम पर मुसलमानों पर होने वाले अत्याचार पर कहा की पिछले कुछ वर्षो से संघ परिवार से जुड़े गौरक्षकों के हाथों दर्जनों निर्दोष मुसलमानों को जान से हाथ धोना पड़ा। देश में ऐसे हालात बना दिये गए हैं कि बीफ रखने या उसे ले जाने का आरोप ही, चाहे वह सही हो या गलत, इस बात के लिए काफी है कि किसी व्यक्ति को सरेआम बेदर्दी से पीट-पीट कर मार दिया जाए।

पाॅपुलर फ्रंट आफ इंडिया ने कहा की मध्य प्रदेश में ऐसे और भी घटनाएं हो चुकी है। राज्य में कांग्रेस की सरकार के आने के बाद यहां के अल्पसंख्यक समुदाय ने चैन की साँस ली और सोचा की चुनी हुई सरकार अराजकता खत्म कर देगी और अपराधी गौरक्षकों को कानून के कटघरे में खड़ा करेगी। परन्तु उनकी बैचैनी और बढ़ गई जब उन्होंने मामले को इसके विपरीत पाया।


कांग्रेस सरकार गौरक्षकों के ही एजेंडे को पूरा करती नज़र आ रही है। गाय काटने और उसे एक जगह से दूसरे जगह ले जाने को राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले से जोड़कर कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने यह साबित कर दिया है। कि वह RSS के राष्ट्रवाद की सोच से कितना करीबी ताल्लुक रखती है। भले ही कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इसकी निंदा की थी। लेकिन पार्टी अपने मुख्यमंत्री के कदम को ठीक करने में असफल रही है।

इसके साथ यह भी कहा की इस प्रकार की गलतियों न रोकने के कारण ही मुस्लिम व अन्य अल्पसंख्य समुदाय आम चुनाव के मौके पर पार्टी से दूर होते जा रहे हैं।

वहीं पाॅपुलर फ्रंट की केंद्रीय सचिवालय की बैठक ने योगी सरकार पर भी आरोप लगाया और कहा की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुज़फ्फर नगर दंगों से जुड़े 131 मामलों को वापस लेने की पूरी तैयारी में है। जिस दंगो में दर्जनों निर्दोष विशेषकर मुसलमानों की बेदर्दी से हत्या कर दी गई थी। योगी जिन मामलों को वापस लेने की तैयारी में है, उनमें हत्या सहित बीजेपी के स्थानीय नेताओं के खिलाफ गंभीर मामले दर्ज हैं। ये तो ज़ाहिर सी बात है कि मुख्यमंत्री हत्या, रेप और आगज़नी के दोषी अपनी पार्टी के लोगों और समर्थकों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

आखिर में बैठक ने यह उम्मीद जताई कि न्यायपालिका यूपी सरकार में Law And Order के इस खुले उल्लंघन को ज़रूर रोकेगी।

पाॅपुलर फ्रंट की अध्यक्षता चेयरमैन ई. अबूबकर ने करी। इस बैठक में एम. मुहम्मद अली जिन्ना, OMA सलाम, K.M .शरीफ, अब्दुल वाहिद सेठ और E M अब्दुर्रहमान शामिल हुए।

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