fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
अन्य

NRC लिस्ट से बाहर हुए 19 लाख लोगो के साथ होगा यह, जानिए पूरा मामला

This-will-be-done-with-19-lakh-people-excluded-from-NRC-list,-know-the-whole-matter
(image credits: scroll.in)

असम में एनआरसी की मार से लोग ख़ासा परेशान है। ऐसे में जिनका नाम लिस्ट में नहीं है उन्हें विदेशी घोषित किया जा रहा है। इस मामले को लेकर सरकार ने अभी तक कोई बड़ा कदम नहीं उठाया है। असम में बीजेपी की सरकार है इसके बावजूद लोग एनआरसी की वजह से परेशान है। असम में बीजेपी सरकार लोगो को राहत देने का काम भी ठीक से नहीं कर पा रही। लाखो लोगो के नाम लिस्ट में नहीं है और सभी लोग सरकार से मदद की गुहार लगा रहे है।

Advertisement

असम में अद्यतन राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानि NRC की अंतिम सूची पिछले साल प्रकाशित अंतिम मसौदे में शामिल किए गए 40 लाख लोगों में से लगभग आधे को छोड़कर 19 लाख से अधिक लोगों को बाहर रखा गया है। 3.3 करोड़ आवेदकों में से, कुल 3,11,21,004 व्यक्तियों को अंतिम एनआरसी में शामिल करने योग्य पाया गया।

NRC के राज्य समन्वयक प्रतीक हजेला ने कहा ‘क्लॉज 4 के तहत सभी दावों और आक्षेपों और कार्यवाही के निपटान के बाद पहले से ही शामिल सभी लोगों को ध्यान में रखते हुए, यह पाया गया है कि अंतिम एनटीसी में कुल 3,11,21,004 व्यक्ति शामिल हुए हैं। 19,06,657 लोगों को छोड़ दिया गया, जिनमें दावा प्रस्तुत नहीं करने वाले लोग भी शामिल हैं’।

केंद्र सरकार ने कहा है कि NRC की लिस्ट में जिसका नाम नहीं होगा उसे तुरंत विदेशी घोषित नहीं किया जाएगा। बल्कि उसे कानूनी लड़ाई लड़ने का समय दिया जाएगा। गृह मंत्रालय ने इस साल 30 मई को एक आदेश में कहा था कि ट्रिब्यूनल को रिकॉर्ड के उत्पादन की तारीख से 120 दिनों के भीतर अपना अंतिम आदेश देना है। राज्य सरकार के अधिकारियों ने कहा कि 100 विदेशी ट्रिब्यूनलों के अलावा, 1 सितंबर तक 200 और कार्यशील हो जाएंगे।

यदि आवेदक ऐसे अधिकरण के समक्ष अपना मामला खो देता है, तो वह उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है और यदि आवश्यक हो तो उच्चतम न्यायालय भी। किसी को अगर अंतिम एनआरसी से बाहर रखा गया है, और एक विदेशी ट्रिब्यूनल में अपने मामले को भी खो देता है, तो उसे गिरफ्तारी का सामना करना पड़ सकता है, और एक हिरासत केंद्र में भेजा जा सकता है।


पिछले साल जुलाई में प्रकाशित NRC के अंतिम मसौदे में 2.89 करोड़ आवेदक शामिल थे और 40 लाख से अधिक लोगों को छोड़ दिया गया था। उन 36 लाख से अधिक लोगों ने बहिष्कार के खिलाफ ‘दावे’ दायर किए थे। इसमें शामिल 2.89 करोड़ में से लगभग 2 लाख लोगों के खिलाफ आपत्तियां दर्ज की गईं। इस साल 26 जून की ड्राफ्ट अपवर्जन सूची में, 2.89 करोड़ में से 1.02 लाख को बाहर कर दिया गया, जिन्हें सभी को अपने मामलों को अपील करने का मौका दिया गया था।

NRC को पहली बार 1951 में तैयार किया गया था, जिस पर केंद्र सरकार और असम सरकार ने हक्ष्ताक्षर किये थेऔर वर्तमान अभ्यास एक अद्यतन है। अंतिम एनआरसी में 1951 एनआरसी और उनके वंश के लोगों के नाम शामिल हैं। इसमें 24 मार्च 1971 तक के किसी भी मतदाता सूची में शामिल हैं, या उस तिथि तक जारी किए गए किसी भी अन्य स्वीकार्य दस्तावेज के साथ-साथ ऐसे लोगों के वंशज भी शामिल हैं।

NRC के ड्राफ्ट अपवर्जन सूची की तैयारी को अनुसूचित जाति की नागरिकता नियम, 2003 के खंड 5 के तहत अनुमोदित किया गया था। सरकार असम के लोगो को राहत पहुंचाने के लिए क्या कदम उठाएगी यह तो वक्त बताएगा। परन्तु सोचने वाली बात यह है की लिस्ट से बाहर किये गए 19 लाख लोगो का आखिर होगा क्या और जायेंगे कहाँ। सब लोगो की नजर सिर्फ सरकार पर टिकी है की वह NRC की मार झेल रहे लोगो के लिए कुछ करेगी।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved