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उबेर और ओला पर भी मंदी का बुरा असर, उबेर ने निकाले इतने कर्मचारी

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(image credits: moneycontrol)

धीरे-धीरे मंदी की मार सभी व्यापारों पर आने लगी है और इसका असर रोजगार पर भी पड़ने लगा है। केंद्र सरकार अर्थव्यवस्था और मंदी की रिपोर्ट को झूठा साबित करने में लगी है तो वहीँ लोग मंदी के चलते अपनी नौकरियां गवां रहे है।

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पिछले दिनों ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटो सेक्टर में मंदी का जिम्मेदार उबेर और ओला को बताया था और यह कहा था की आज कल सभी लोग उबेर और ओला का इस्तेमाल करते है। इसलिए कोई गाडी नहीं खरीद रहा।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि ऑटो सेक्टर ऑटो-मोबाइल इंडस्ट्री BS6 स्टैंडर्ड और मिलेनियल्स के माइंड सेट से सबसे ज्यादा प्रभावित है। परन्तु सिआसत में छपी खबर से तो कुछ और ही बात सामने आ रही है। मंदी ने देश को डूबा  दिया है और अब उबेर भी इस मंदी की चपेट में आ गया है।

अमेरिकी मुख्यालय वाले टैक्सी एग्रीगेटर कंपनी उबर की आर्थ‍िक हालत अच्छी नहीं चल रही है। अमेरिका में कंपनी का घाटा बढ़ता जा रहा है, इस वजह से उसने अपनी प्रोडक्ट एवं इंजीनियरिंग टीम से 435 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है।

दो महीने में अमेरिका में कंपनी ने दूसरी बार छंटनी की है। इसके पहले जुलाई में भी कंपनी ने अपनी मार्केटिंग टीम से 400 कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया था। गौरतलब है कि भारत में भी उबर का कारोबार अच्छा नहीं चल रहा।


निर्मला सीतारमण ने कहा कि ऑटो सेक्टर ऑटो-मोबाइल इंडस्ट्री BS6 स्टैंडर्ड और मिलेनियल्स के माइंड सेट से सबसे ज्यादा प्रभावित है।

इस बार की छंटनी में इसके अमेरिकी दफ्तरों से करीब 8 फीसदी कर्मचारी बाहर हो गए हैं। 170 लोग प्रोडक्ट टीम से और 265 लोगों को इंजीनियरिंग टीम से बाहर निकाला गया है। कंपनी ने एक बयान में इस छंटनी की पुष्ट‍ि की है। उबर की प्रवक्ता ने कहा है, ‘हमें उम्मीद है कि आगे स्थ‍िति सुधरेगी, हम अपनी प्राथमिकता के हिसाब से काम कर रहे हैं और उच्च प्रदर्शन के आधार पर अपने को जवाबदेह बनाए हुए हैं।’

उबर को इस साल मई में ही न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध किया गया है, हालांकि इसके आईपीओ को अच्छा रिस्पांस नहीं मिला था। इसके बावजूद यह अमेरिका के पिछले पांच साल के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ था और इससे कंपनी ने 8.1 अरब डॉलर रकम जुटाई थी। जून तिमाही में कंपनी को एक तिमाही का सबसे बड़ा 5.2 अरब डॉलर का घाटा हुआ था।

भारत की बात करें तो बीते जून महीने में इकोनॉमिक्‍स टाइम्‍स की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि ओला और उबर की ग्रोथ रेट सुस्त पड़ गई है। तब रिपोर्ट में बताया गया था कि 6 महीनों के दौरान ओला और उबर के डेली राइड्स में सिर्फ 4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. पहले डेली राइड्स 35 लाख था जो अब करीब 36.5 लाख पर है।

देखा जाए तो  केंद्र सरकार हर बार एक नया झूठ सामने रख रही है और अपनी गलती से बचने की कोशिश कर रही है। मंदी से बचने का रास्ता अभी तक बीजेपी के  पास नहीं परन्तु सच कैसे छुपाना है इसके कई रास्ते बीजेपी के पास मौजूद है। 

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