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उत्तर प्रदेश: कानून व्यवस्था विफल होने के कारण कॉन्स्टेबल ने की योगी को बर्खास्त करने की मांग, कॉन्स्टेबल को ही कर दिया बर्खास्त

Uttar-Pradesh: -due-to-failing-in-law-and-order,-the-constable-asked-for-sacking-of-Yogi,-contrary-constable-gets-dismissed
(image credits: पर्दाफाश PardaPhash)

उत्तर प्रदेश में कानून में व्यवस्था की पोल खोलना एक कॉन्स्टेबल को भारी पड़ गया। यह अक्सर सुनने को मिलता है की बीजेपी सरकार उनके खिलाफ बोलने वाले पर कार्रवाई करने से पीछे नहीं हठती है। ऐसा ही एक बार फिर देखने को को मिल रहा है। दरअसल उत्तर प्रदेश में पीएसी (प्रोविंशियल आर्म्ड कॉन्स्टेब्युलरी) के एक कांस्टेबल को सिर्फ इसलिए बर्खास्त कर दिया गया है, क्यूंकि उसने राज्य में कानून व्यवस्था की सच्चाई बताते हुए CM योगी को बर्खास्त करने की मांग की थी।

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कांस्टेबल मुनीश यादव ने शनिवार को अपनी वर्दी के साथ लाल समाजवादी टोपी पहनी और जिला कलेक्ट्रेट में एक तख्ती लेकर गए पहुंच गए। जिस पर लिखा था “योगी सरकार को बर्खास्त करो”. मुनीश यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, राज्य सरकार को बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए क्योंकि यह कानून और व्यवस्था कायम रखने में विफल साबित हो रही है।

कांस्टेबल ने कहा, वह जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को इस संबंध में ज्ञापन देने आए थे। जिलाधिकारी जे.बी. सिंह ने कहा कि कांस्टेबल उनसे नहीं मिला, लेकिन उन्होंने मीडियाकर्मियों से घटना के बारे में सुना है। इटावा के रहने वाले मुनीश यादव वर्तमान में नोएडा में तैनात हैं।

इस सन्दर्भ में पुलिस महानिदेशक ओ.पी.सिंह ने घटना का संज्ञान लिया है। और घोर अनुशासनहीनता के आरोप में मुनीश यादव की बर्खास्तगी के आदेश जारी किए हैं।

अब हमे यह समझ नहीं आता की, किसी राज्य में कानून व्यवस्था की सच्चाई बताने की कोशिश करना, किस प्रकार अनुशासनहीनता हो सकती है।


वहीं दूसरी ओर मुनीश यादव के परिवार के सदस्यों ने निवेदन किया कि वह मानसिक रूप से परेशान है, इसलिए यह घटना हुई। बता दे की ऐसा पहली दफे नहीं हो रहा जब योगी सरकार के खिलाफ बोलने पर किसी के साथ कार्रवाई की जा रही हो, इससे पहले भी एक पत्रकार प्रशांत कनौजिया को मुख्यमंत्री योगी पर टिप्पणी करने पर गिरफ्तार कर लिया गया था। हालाँकि बाद में उन्हें हाई कोर्ट के आदेश पर रिहा कर दिया गया।

दरअसल पत्रकार कनौजिया पर आरोप था की उन्होंने अपने ट्वीटर अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमे एक महिला को मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर बात करते हुए देखा गया। इसमें महिला दावा कर रही है की मुख्यमंत्री ने उन्हें विवाह का प्रस्ताव भेजा है। इसी पोस्ट के आधार पर पत्रकार को गिरफ्तार किया गया।

कमाल की बात तो यह है की,अगर राज्य सरकार पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई कर रही है तो, वीडियो में शादी के प्रस्ताव का दावा करने वाली महिला के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि चीजें आसान हो सके। इसके साथ साथ इस पूरे ड्रामे का सच भी लोगो को पता चलना चाहिए।

योगी सरकार द्वारा बात बात पर उनके खिलाफ बोलने या राज्य में प्रसाशन व्यवस्था की सच्चाई रखने वाले लोगो पर इस प्रकार कार्रवाई कर देना उचित नहीं है। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार अक्सर अपने राज्य में कानून व्यवस्था दुरूस्त होने की दुहाई देते रहती है। परन्तु वास्तव में जो सच्चाई है, वो सबके सामने है।

राज्य सरकार को यह पता होना चाहिए की, मात्र दावे करने से ही कानून व्यवस्था नहीं सुधर जाती है, बल्कि इसके लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने के साथ साथ अहम बदलाव करने की भी जरुरत होती है।

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