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विभिन्न संगठनों ने नवदलित विमर्श कार्यक्रम आयोजित किया, कहा- आर्थिक आधार पर आरक्षण संविधान की भावना के खिलाफ

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(Representational Image) (Image Credits: MediaVigil)

हरिद्वार नवदलित विमर्श समन्वय समिति के बैनर तले विभिन्न संगठनों की ओर से रविवार को भगत सिंह चौक के पास मौजूद नेहरू युवा केंद्र में नवदलित विमर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। बातचीत के दौरान उर्मिलेश का कहना था की आर्थिक आधार पर आरक्षण संविधान की भावना के खिलाफ है। इसके आधार पर केवल राजनीतिक हित साधने की कोशिश की जा रही है।

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उर्मिलेश का कहना है की भारतीय समाज में फूट डालो की नीति काफी प्राचीन समय से चली आ रही है। इसका प्रतिकार डॉ. भीमराव आंबेडकर ने किया। दलित समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान किया गया। कहा कि गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम सरकार चलाती है, इसलिए आर्थिक स्तर पर सुधार न होना सरकारों की नाकामी है। अधिकांश सरकारी पदों पर अगड़ी जातियों का ही कब्जा है। यदि देश के लोकतांत्रिक व्यवस्था को वास्तव में मजबूत करना है तो देश को जातिविहीन व्यवस्था करनी होगी।

उर्मिलेश का कहना है की केंद्रीय विश्वविद्यालयों, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सचिवालयों और अन्य कार्यालयों में अगड़ी जाति ही सबसे ज्यादा हैं। फिर आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का क्या औचित्य। दूसरी और, दिल्ली के हिन्दू लॉ कॉलेज के प्रोफेसर रतन लाल का कहना है कि नवदलित विमर्श देश और संविधान बचाने का आंदोलन है। कहा कि दलित देश के दोयम नहीं, प्रथम दर्जे के नागरिक हैं।

राजनीतिक लड़ाई ने दलितों को दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. पंकज श्रीवास्तव ने आरक्षण को राजनीतिक हथियार के रूप में प्रयोग करने की दलों के नीति की आलोचना की। कहा कि मकसद, सोच सही और पारदर्शी होनी चाहिए। इस दौरान महापौर अनीता शर्मा, पूर्व विधायक अंबरीश कुमार आदि ने भी अपने विचार रखे। संचालन लेनिन रघुवंशी और श्रमिक नेता मुरली मनोहर ने किया। कार्यक्रम में पूर्व दर्जाधारी संजय पालीवाल, पूर्व विधायक रामजस, सतपाल ब्रह्मचारी, अशोक शर्मा, महानगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल, पार्षद अनुज ¨सह, अंजू द्विवेदी सहित अन्य उपस्थित रहे।


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