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सपा नेता राजेन्द्र चौधरी ने मायावती पर साधा निशाना

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(image credits: Patrika)

लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी की जीत के बाद सपा ओर बसपा में तकरार दिखना शरू हो गया। चुनाव परिणाम आने के कुछ दिनों बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा बसपा गठबधंन तोड़ने का निर्णय लिया। हालाँकि उन्होंने साथ में यह भी कहा की इससे उनके और सपा के पारिवारिक रिश्तों में कोई बदलाव नहीं आएगा। इसके बाद मायावती ने गठबंधन से अलग होकर आने वाले उपचुनाव में अकेले लड़ने का निर्णय लिया है।

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वहीँ अब इसके बाद सपा और बसपा के बीच कुछ बयानबाजी भी देखने को मिल रही है। दरअसल गठबंधन के असफल होने पर मायावती के बयानों पर सपा नेता ने टिप्पणी करते हुए कहा की वह बसपा की सच्चाई जानते हैं, आने वाले उपचुनाव में जनता इसका जवाब देगी। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने एक सवाल पर कहा कि बसपा प्रमुख भले ही सपा पर टिप्पणी कर रही हों, लेकिन जनता उनकी असलियत जानती है। बसपा प्रमुख के बयानों पर सपा अध्यक्ष की कोई प्रतिक्रिया नहीं आने के बारे में जब उनसे पूछा गया तो, उन्होंने कहा कि प्रदेश की 12 विधानसभा सीटों के लिये होने वाले उपचुनाव में जनता बसपा को जवाब देगी।

सपा नेता चौधरी ने कहा, उनकी पार्टी ने आने वाले उपचुनाव के लिए सभी तैयारी कर ली है, और वह सभी विपक्षी पार्टियों को जवाब देने को भी तैयार है। बता दे की दोनों पार्टियों ने लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ा था। परन्तु इस गठजोड़ को खासी कामयाबी नहीं मिल सकी। चुनाव में बसपा को 10 और सपा को पांच सीटें मिली थीं। देखा जाये तो बसपा ने इस चुनाव में वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से बेहतर प्रदर्शन किया है। पिछले बार बसपा एक भी सीट नहीं हासिल कर पाई थी।

बहरहाल बसपा ने पिछले दिनों सपा से गठबंधन को नुकसान बताते हुए इसे खत्म कर दिया था। इसके साथ ही भविष्य में सभी चुनाव अपने बलबूते लड़ने का एलान भी किया था। बता दें की लोकसभा चुनाव मे प्रदेश के 11 विधायक सांसद बन गये हैं। इनमें से आठ विधायक भाजपा और एक-एक विधायक सपा और बसपा के हैं। इन सीटों में रामपुर, टूंडला, इगलास, गंगोह, जलालपुर, जैदपुर, बलहा, लखनऊ कैंट, गोविंद नगर, प्रतापगढ़ और मानिकपुर शामिल हैं। इन्ही सीटों पर उपचुनाव भी होने हैं। फ़िलहाल चुनाव की तारीख घोषित नहीं हुई है।

सपा नेताओं द्वारा मायावती को लेकर टिप्पणी करना उचित नहीं लगता है। सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी द्वारा टिपण्णी करने की बजाय, दोनों पार्टियों को लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद उनसे से हुई भूल को पहचानना चाहिए। और एक नई रणनीति के साथ मौजूदा सरकार की असफलताओ पर सवाल करना चाहिए। समाजवादी पार्टी को यह समझना चाहिए की एक दूसरे पर सवाल खड़ा करने से मुश्किलें हल नहीं होंगी बल्कि इससे हालात और भी अधिक खराब हो सकते है।


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