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गोवा में कांग्रेस के 10 विधायक बीजेपी में हुए शामिल, आरएसएस कार्यकर्त्ता ने जताई नाराजगी

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(image credits: Scroll.in)

लगता है बीजेपी में कुछ नेताओं और आरएसएस से जुड़े कुछ लोगो को दूसरे पार्टी से बीजेपी में शामिल हुए लोग या आलाकामान द्वारा पार्टी में लाये गए नए चेहरे पसंद नहीं है। लोकसभा चुनाव के दौरान से ही पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा बीजेपी में शामिल किये गए नए चेहरे को लेकर नाराजगी जताई गई।

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एक तरफ मौजूदा सरकार अपनी पार्टी में नए लोगो को शामिल करने में लगी है, वहीं दसूरी और बीजेपी में कुछ लोगो द्वारा इसके लिए नाराजगी दिखाई जा रही है। वेस्ट बंगाल में तृणमूल नेताओ का बीजेपी में शामिल होने पर पार्टी के कुछ लोगो द्वारा इसका विरोध करना इसका एक उदाहरण है।

इसी प्रकार अभी गोवा कांग्रेस से 10 विधायक बीजेपी में शामिल हुए है। पार्टी ने आज राज्य में अपने कैबिनेट का विस्तार किया, वहीं इसके साथ बीजेपी ने बड़े ही नाटकीय तरीके से कांग्रेस के 17 में से 10 विधायक शामिल कर लिए हैं। 40 सदस्यों वाली विधानसभा में बीजेपी के अब 17 से 27 विधायक हो गए हैं। एक तरफ जहाँ बीजेपी के बड़े नेता इस राजनीतिक सफलता पर इतरा रहे हैं, पर वहीं जमीन पर कार्यकर्ता इससे खुश नहीं दिख रहे हैं।

कुछ लोगो ने इसको पूरी तरह से ‘हतोत्साह’ बताया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक से जुड़े बीजेपी के कार्यकर्ता सुमंत जोगलेकर का कहना है, ‘मैं पूरी तरह से हतोत्साहित हो गया हूं. मैं उनको (कांग्रेस विधायकों) को बीजेपी और कैबिनेट में शामिल करने के विचार के फैसले से सहमत नही हूं’ बता दे की सुमंत के पिता गोवा में उन लोगो में से हैं जो आरएसएस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और राज्य में बीजेपी को खड़ा करने में उनका बड़ा योगदान रहा है।

सुमंत ने न्यूज़ चैनल एनडीटीवी से बातचीत में कहा, ‘हमारे नेताओं को जनता से नहीं मिलना होता. हमें सामना करना पड़ता है. हमें सदस्यता और वोटों के लिए बात करनी पड़ती है. मैं अपने सिद्धांतों समझौता के लिए राजी नहीं हूं. मैं इस फैसले के खिलाफ हूं।


वहीं इस मामले में वरिष्ठ पत्रकार अरविंद तेंगसे का कहना है कि उन्होंने भी राष्ट्रीय चुनाव में बीजेपी को ही वोट दिया है. वह इस बात से दुखी हैं कि अचानक से कांग्रेस के विधायक बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। उनकी आपत्ति बाबुश मोनसेरेटे के शामिल होने पर जिसका विरोध बीजेपी ने दो महीने उप चुनाव में किया था।

कांग्रेस नेता के इस तरह बीजेपी में शामिल होने से कांग्रेस कार्यकर्त्ता भी नाराज दिखाई दे रहे है। उनका कहना है की जिसके लिए उन्होंने काम किया वह अचानक से दूर चले गए। कुछ इसी प्रकार 52 साल के कांग्रेस के कार्यकर्ता फ्लोरिना कोलाको का कहना है कि ये दलबदलू अगली बार चुनाव नहीं जीत पाएंगे। उन्होंने दुख पहुंचाया है. सभी पार्टियों के वोटर और कार्यकर्ता इस बात से हैरान हैं कि कुछ महीनों पहले ही जिन नेताओें ने पार्टी की विचारधारा की कसम खाई थी उन्होंने किस तरह से यू-टर्न ले लिया।

आरएसएस और बीजेपी में पार्टी में नए चेहरे को शामिल करने से कुछ दिनों से ही नाराजगी दिखाई दे रही है। इससे पहले सपना चौधरी के पार्टी में शामिल होने से आरएसएस कार्यकर्ता नाराज हो गए थे।

इन सभी बातो से लगता है की किसी किसी मामलो में बीजेपी निर्णय लेने के दौरान आरएसएस को भी अनदेखा कर देती है। बीजेपी के इस प्रकार के रवैये से लगता है की पार्टी धीरे धीरे निर्णय लेने के लिए तानाशाही रुख अपनाना शुरू कर देगी।

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