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उपचुनाव से पहले ही अखिलेश की मुसीबते बढ़ी, पार्टी को हो सकता है बड़ा नुकसान

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(image credits: Naya India)

उपचुनाव अगले साल शुरू होने वाले है ऐसे में कई पार्टियां अभी से लोगो को लुभाने में लग गयी है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जीत और EVM बड़ा मुद्दा बना रहा तो वही अखिलेश यादव और मायावती का गठबंधन भी चर्चा में रहा। चुनाव से पहले सपा-बसपा गठबंधन काफी चर्चा में रहा है। बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, दोनों ने ही अपनी पुरानी लड़ाई को भुला कर गठबंधन कर लिया था। परन्तु लोकसभा चुनाव के बाद दोनों ही पार्टी अलग हो गयी।

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उपचुनाव अगले साल होने वाले है परन्तु लगता है की कहिलेश यादव की मुसीबत बढ़ने वाली है। गठबंधन टूटने के बाद सपा ने अकेले ही चुनाव लड़ने का फैसला लिया है परन्तु इस बिच अखिलेश यादव की मुसीबत बढती जा रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानि सीबीआई भष्टाचार के दो नए मामलों की जांच कर रही है, जो अखिलेश के सरकार के समय हुए हैं। प्रदेश में 1,100 करोड़ रुपये के चीनी मिल घोटाले में नौकरशाहों और राजनेताओं की सांठगांठ की पोल खुल रही है। करोड़ के रेत खनन घोटाले का तार समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के सहयोगी गायत्री प्रजापति और छह नौकरशाहों से जुड़ा है।

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री प्रजापति और तीन आईएएस अधिकारियों के विभिन्न परिसरों की बुधवार को तलाशी के बाद सीबीआई के सूत्रों ने बताया कि एजेंसी अखिलेश यादव से उनके कार्यकाल में हुए रेत खनन घोटाले के सिलसिले में पूछताछ कर सकती है।

जनसत्ता में छपी खबर के मुताबिक गायत्री प्रजापति को कैबिनेट मंत्री नियुक्त किए जाने से पहले मार्च, 2012 से लेकर जुलाई, 2013 तक तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास खनन मंत्रालय था। इस दौरान कथित तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने खनन पट्टे से जुड़ी कई फाइलों को मंजूरी दी।

एजेंसी यह सुनिश्चित करने के लिए इन फाइलों का ऑडिट करवाएगी कि क्या मुख्यमंत्री कार्यालय ने निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया। गायत्री प्रजापति के मामले में सीबीआई ने पाया कि अनिवार्य ई-टेंडर नियमों का पूर्ण रूप से उल्लंघन किया गया।


मंत्री के रूप में प्रजापति ने कथित तौर पर अपनी पसंद के ठेकेदारों को सीधे पट्टा देना मंजूर किया था। इसके बाद प्रजापति के निर्देश पर उनके अधीनस्थों, खनन सचिव और जिलाधिकारियों ने पट्टा संबंधी फाइलों पर हस्ताक्षर किए। सूत्रों ने बताया कि हालांकि बाद में अखिलेश यादव ने प्रजापति को बर्खास्त कर दिया, लेकिन उनके द्वारा कथित तौर पर किए गए उल्लंघन को मुख्यमंत्री कार्यालय ने सीधे तौर पर नजरंदाज कर दिया।

अपने लोगो द्वारा किये घोटाले के चलते अखिलेश यादव को काफी मुसीबत झेलनी पड़ रही है। ऐसे में उपचुनाव पर इसका बुरा असर पड सकता है। अखिलेश यादव उपचुनाव की तैयारी में लगे है ऐसे में देखना यह है की पुराने कार्यकाल में हुए घोटालो से अखिलेश और उनकी पार्टी को कितना नुकसान होता है।

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