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मंत्री पद को लेकर बंगाल बीजेपी अध्यक्ष ने जताया असंतोष

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(image credits: Kolkata24x7)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शपथ लेने के बाद सभी राज्यों से चुन के आये सांसदों को भिन्न भिन्न मंत्री पद दिए गए। इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सरकार बनाने के साथ साथ पश्चिम बंगाल में भी सही प्रदर्शन किया। बंगाल में भारतीय जनता पार्टी को 18 सीटें प्राप्त हुई, हलांकि बीजेपी तृणमूल कांग्रेस को हराने में नाकामयाब रही। सभी राज्यों की तरह बंगाल से चुनकर आये सांसदों को भी कोई न कोई मंत्री पद दिया गया।

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लेकिन सुनने में यह आ रहा है की पश्चिम बगाल में कुछ सांसद अपने मंत्री पद को लेकर बीजेपी से नाराज है। हम बात करने जा रहे हैं बीजेपी सांसद दिलीप घोष की। दरअसल बीजेपी ने बंगाल से सिर्फ दो मंत्रियों को शामिल किया गया है। पार्टी और सरकार के इस फैसले को लेकर दिलीप घोष ने सरकार के प्रति गहरा असंतोष व्यक्त किया है। एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक, दिलीप घोष ने कहा कि उन्हें नरेंद्र मोदी सरकार में बंगाल से 5 से 6 मंत्रियों की उम्मीद थी और वह महज 2 मंत्रियों से संतुष्ट नहीं हैं।

सांसद दिलीप घोष ने खुद मिदनापुर सीट पर जीत दर्ज की है। द टेलिग्राफ में प्रकाशित खबर के मुताबिक, बंगाल बीजेपी प्रमुख ने कहा,‘मेरी गुरुवार को रामलाल जी (संगठन महासचिव) जी से बात हुई थी। मैंने मंत्री पद को लेकर हमारी आकांक्षाओं से उन्हें अवगत कराया था। मैंने कहा कि जब हमारे बस दो सांसद थे तो दोनों को मंत्री पद मिले। अब जब हमारे पास 18 सांसद हैं तो भी हमें उतने ही पद मिले।’

सांसद दिलीप घोष ने कहा उन्हें कम से कम 5 से 6 मंत्री पद बनाए जाने की उम्मीद थी। आपको बता दे मोदी सरकार में बंगाल से सिर्फ बाबुल सुप्रियो और देवश्री मुखर्जी को ही मंत्री बनाया गया। दोनों ने राज्यमंत्री के तौर पर गुरुवार को अपने पद और गोपनीयता की शपथ ली।

अंग्रेजी अखबार ने बीजेपी सूत्रों के हवाले से बताया कि नॉर्थ बंगाल के बीजेपी नेता एक से ज्यादा राज्यमंत्री पद की उम्मीद कर रहे थे। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इस क्षेत्र से पार्टी के 7 नेता निर्वाचित होकर लोकसभा पहुंचे हैं। रायगंज से निर्वाचित देवश्री चौधरी को चतुष्कोणीय मुकाबले में जीत मिली है।


सांसद देवश्री को मंत्री पद दिया गया लेकिन, अलीपुर द्वार से जॉन बारला और जलपाईगुड़ी से जयंत रॉय के नाम पर भी अटकलें चल रही थीं। दूसरी और, राज्य के नेता इस बात से भी निराश हैं कि साउथ बंगाल से उन्हें बाबुल के तौर पर सिर्फ एक प्रतिनिधि मिला। बाबुल ने आसनसोल सीट पर जीत दर्ज की है। वहीं, बंगाल महिला मोर्चा ने भी इस बात पर नाखुशी जताई कि उनकी स्टेट प्रेसिडेंट और हुगली से निर्वाचित लॉकेट चटर्जी को मंत्रीमंडल में जगह नहीं दी गई।

कैबिनेट में जगह न मिलने के बारे में पूछे जाने पर सांसद दिलीप घोष ने कहा, ‘मैं कभी भी केंद्र सरकार का हिस्सा नहीं बनना चाहता था। मैं संगठन का आदमी हूं। मेरा बंगाल के लिए मिशन खत्म नहीं हुआ। मेरा फोकस बंगाल में बीजेपी की सरकार सुनिश्चित करना है।’ उन्होंने आगे बताया, ‘केंद्रीय मंत्रीमंडल में एंट्री के दरवाजे अभी बंद नहीं हुए। हमें उम्मीद है कि मोदीजी और अमितजी न्याय करेंगे। 2014 में, शुरुआत में बंगाल से कोई मंत्री नहीं था। बाद में दोनों सांसदों को सरकार में शामिल किया गया।…हम बेहतर की उम्मीद करते हैं।’

आखिर बीजेपी ने पश्चिम बंगाल से सिर्फ 2 सांसदों को ही मंत्री पद के लिए क्यों चुना, राज्य में 18 सीटें जीतने के बाद केवल 2 सांसदों को ही मंत्री पद के लिए चुनना अजीब लगता है। बीजेपी द्वारा बाकि सांसदों के साथ इस प्रकार का व्यवहार करना उचित नहीं है। इससे तो ऐसा लगता है की भारतीय जनता पार्टी में सबके साथ एक समान व्यवहार नही होता है, कुछ लोगो के साथ भेदभाव किया जाता है। सिर्फ उन्ही नेताओ की सुनी जाती है जो बीजेपी अध्यक्ष और नरेंद्र मोदी के लिए खास माने जाते हो।

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