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उत्तर प्रदेश में भाजपा फिर दलितों को लेकर खेलने जा रही बड़ा खेल

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(Image credits: New Indian Express)

कल शाम करीब 7 बजे नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री पद की शपत ली। शपत समारोह में करीब 8000 लोग देश विदेश से शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी समेत कई दिग्गज नेताओ ने मंत्री पद की शपत ली वही डॉ. महेन्द्र नाथ पांडेय के केन्द्रीय मंत्री बन जाने के बाद यूपी में भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा, इसे लेकर कवायद और कयास दोनों शुरू हो गए हैं।

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माना जाता है कि यूपी की बड़ी जीत में महेंद्रनाथ पांडे का विशेष योगदान रहा है। 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था और भाजपा का यह प्रयोग बहुत सफल हुआ था। पर, केशव प्रसाद के उप मुख्यमंत्री बनते ही मोदी सरकार में राज्यमंत्री रहे डॉ. महेंद्र पांडेय को भाजपा की कमान सौंपी गई। 31 अगस्त 2017 को डॉ. पांडेय की ताजपोशी हुई और माना गया कि ब्राह्मण समीकरण मजबूत करने के लिए उनको मौका दिया गया है।

पार्टी सूत्रों की मानें तो डॉ. पांडेय के रूप में एक बड़े ब्राह्मण चेहरे के केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद भाजपा अब किसी दलित या अन्य पिछड़ी जाति पर दांव खेल सकती है, उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी अपनी सभी सीटों को बचाये रखने के लिए दलितों का सहारा लेंगी।

उत्तर प्रदेश के योगी सरकार में लगतार दलित विरोधी घटनाये पहले के मुकाबले बढ़ी है, पर ऐसे में भी दलितों का भाजपा को साथ होना एक सवाल भी खड़ा करता है। दलितों के दिमाग में क्या है यह अभी कोई पार्टी अच्छे से इस बार नहीं समझ पाई है भले ही भारतीय जनता पार्टी को प्रदेश में उनका साथ मिला हो पर आगे दलितों को अपने साथ बनाये रखना भारतीय जनता पार्टी के लिए एक चिंता का विषय बना हुआ है।

आम चुनावों के दौरान दलितों, पिछड़ों व अल्पसंख्यकों को लेकर जो बताया जा रहा था कि ये वर्ग अभी भी भाजपा को पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर पाया, उसका भरोसा जीतने के लिए पार्टी दलित या ओबीसी चेहरे पर दांव लगा सकती है।


पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा में प्रदेश स्तर के कई ऐसे नेता हैं जिनकी सत्ता और संगठन पर समान रूप से पकड़ है। लिहाजा इन्हीं लोगों में से किसी एक को डॉ. महेन्द्र नाथ पांडेय का उत्तराधिकारी बनाया जा सकता है। इसमें तीन नामों की चर्चा सबसे अधिक है, इसमें पहला नाम परिवहन राज्य मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का आता है, जबकि दूसरे नम्बर पर पार्टी के प्रदेश महामंत्री विद्या सागर सोनकर का नाम लिया जा रहा है। तीसरे नम्बर पर प्रदेश उपाध्यक्ष लक्ष्मण आचार्य का नाम भी तेजी से उछलने लगा है।

जानकार बताते हैं कि अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी में पार्टी अभी से जुट जाना चाहती है। पार्टी की मंशा यह भी है कि वह प्रदेश में सपा बसपा गठबंधन को तोडना चाह रही है ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान सपा बसपा दोबारा वापसी न कर सके। भले ही उत्तर प्रदेश में गठबंधन उतना बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाया हो पर विधानसभा चुनाव के दौरान सपा बसपा को अधिक सीट आने की संभावना भारतीय जनता पार्टी को अभी से लगा रही है।

पिछली बार के मुकाबले बेहतर रही बसपा विधानसभा के चुनाव के दौरान और बेहतर कर मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी में शामिल हो सकती है। भाजपा को यह डर है की कही विधानसभा के चुनाव के दौरान भाजपा को मुँह की ना कहानी पड़े जिसके लिए भाजपा भी अब दलित या अन्य पिछड़ी जाति पर दांव खेलने जा रही हैँ।

लिहाजा भाजपा दलितों के साथ-साथ ओबीसी को भी पूरी तरह से अपने पाले में करने के लिए जोर लगाएगी। हालांकि अगड़ी जाति से पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला एवं प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक का नाम भी चर्चा में है। हालांकि पार्टी प्रवक्ता हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव कवायद या कयासों को नकारते हुए यही कह रहे हैं कि नेतृत्व सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के सूत्र वाक्य के साथ जिस किसी भी नेता को पार्टी के प्रदेश का नेतृत्व सौंपेगा।

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