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बीजेपी वरिष्ठ नेता ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व को लेकर दिया यह बयान

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9image credits: the indian express)

बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने अपनी पार्टी के नेतृत्व पर निशाना साधा है। दरअसल उन्होंने बयान देते हुए कहा है की एक ऐसे नेतृत्व की जररूत है जो प्रधानमंत्री मोदी का निडर होकर सामना कर सके और उनसे बहस कर सके। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर पार्टी लाइन से ऊपर उठकर चर्चा करने की परम्परा ‘लगभग खत्म’ हो चुकी है, और उसे दोबारा शुरू करना होगा। वरिष्ठ नेता के इस प्रकार के बयान से पार्टी के प्रति उनकी नारजगी का पता चलता है।

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मालूम हो की बीजेपी के वरिष्ठ नेता अक्सर अपनी पार्टी से नाराज रहते है। मुरली मनोहर जोशी ने नेतृत्व को लेकर अपना बयान जुलाई में दिवंगत हुए कांग्रेस नेता जयपाल रेड्डी को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में दिया था। उन्होंने कहा हिंदी में कहा कि, “मेरा मानना है कि ऐसे नेतृत्व की बहुत ज़रूरत है, जो बेबाकी से अपनी बात रखता हो, सिद्धांतों के आधार पर प्रधानमंत्री से बहस कर सकता हो, बिना किसी डर के, और बिना इस बात की परवाह किए कि प्रधानमंत्री नाराज़ होंगे या खुश…”

बता दे की वरिष्ठ नेता की यह टिपण्णी इसलिए भी खास हो जाती है क्यूंकि वह अक्सर पार्टी के मौजूदा नेतृत्व की आलोचना करते रहते है। वह पार्टी से इसलिए भी नाराज है क्यूंकि उन्हें इस साल लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका नहीं दिया गया। मुरली मनोहर जोशी और उपप्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी वर्ष 2014 से शुरू हुए नरेंद्र मोदी-अमित शाह युग में उन नेताओं में शुमार कर दिए गए हैं, जिन्हें जबरन सेवानिवृत्त कर दिया गया।

मंगलवार को हुए कार्यक्रम में मुरली मनोहर जोशी ने याद किया कि 1990 के दशक में जब जयपाल रेड्डी मंत्री थे, वह बौद्धिक संपदा अधिकारों पर चर्चा के लिए एक अहम फोरम के सदस्य भी थे, और अक्सर सरकार के रुख से अलग राय पेश किया करते थे। उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) जैसे अहम मुद्दों पर जयपाल रेड्डी एवं वामदल सहित अन्य दलों के नेताओं की मौजूदगी वाले विभिन्न नेताओं के समूहों (फोरम) का जिक्र किया। और उन्होंने बताया कि इन समूहों में दलगत विचारधारा से हटकर विचार-विमर्श होता था।

बीजेपी वरिष्ठ नेताओं द्वारा अक्सर पार्टी के नेतृत्व से नाराज रहना ये दिखाता है की पार्टी हाई कमान कोई भी निर्णय लेने से पहले इन नेताओं को अनदेखा कर देता है। देखा जाये तो केंद्र की भाजपा सरकार में सिर्फ गिने चुने लोगो की ही सुनी जाती है। पार्टी आलाकमान द्वारा वरिष्ठ नेताओं के साथ इस प्रकार का व्यवहार उचित नहीं है।


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