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बसपा प्रमुख मायावती ने जम्मू कश्मीर से विशेष दर्जा हटने के बाद बीजेपी को दी यह नसीहत

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(image credits: new indian express)

जम्मू कश्मीर से विशेष दर्जा हटाए जाने के बाद कई विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने इस पर अपने विचार रखे। कुछ विपक्षी दलों ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया तो गिने चुने पार्टियों ने सरकार का समर्थन किया। लगभग सभी विपक्षी दलों ने इस निर्णय पर सरकार की कमियों और उनके तरीके को लेकर सवाल उठाये।

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वहीं इसी बीच अब बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने विशेष दर्जा हटने के बाद मौजूदा सरकार से घाटी के लोगो में विश्वास पैदा करने की बात की है। मायावती ने गुरुवार को कहा कि सरकार को जम्मू-कश्मीर के लोगों को विश्वास दिलाना चाहिए कि वह उनकी भलाई के लिए काम कर रही है।

बसपा प्रमुख व उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने 73वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाल किले से किए गए सम्बोधन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा कि, सरकार जम्मू कश्मीर के निवासियों की भलाई का दावा कर रही है, मगर उसे जनता को इसका एहसास भी दिलाना चाहिए।

उन्होंने अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाए जाने के बाद उत्पन्न हालात की तरफ इशारा करते हुए कहा, ‘जहां तक जम्मू-कश्मीर की बात है, तो वहां के लोगों को इस बात का एहसास होना चाहिए कि सरकार उनके हित और भलाई के लिए काम कर रही है, जैसा कि दावा किया जा रहा है।’

इंडिया टीवी न्यूज़ डॉट कॉम के अनुसार, मायावती ने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि, प्रधानमंत्री का अपने भाषण में देश भर में छाई खासकर व्यापक गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी और अशिक्षा के साथ-साथ , तनाव और जातिवादी द्वेष जैसे मुद्दों का कोई जिक्र नहीं करने से यह साबित होता है कि देश की आम जनता के जीवन में बेहतर बदलाव की आशा बहुत कम है।


बसपा प्रमुख ने कहा कि ज्यादातर सरकारी घोषणाएं और दावे कागजी ही नजर आते हैं। उन्होंने कहा, ‘जमीन पर कुछ भी नहीं दिखाई देता। इससे देश का भला कैसे हो सकता है। प्रधानमंत्री अपने भाषण में इन मुद्दों के साथ साथ देश में भयमुक्त वातावरण बनाने के बारे में भी कुछ बोलते तो अच्छा होता।’

बता दें की स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने रोजगार और देश में पर्यटन स्थल को बढ़ावा देने की बातें कही। साथ ही उन्होंने पर्यावरण और किसानो के बारे में भी कई बाते की। अब देखना यह होगा की प्रधानमंत्री ने जितने भी बाते किए है, उनमे से कितनो को सरकार द्वारा ध्यान रखा जाएगा। वैसे अगर गौर किया जाए तो यह अक्सर देखा जाता है की बहुत से बाते सिर्फ भाषण तक ही सीमित रह जाती है।

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