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संसद में चुनाव आयोग को लेकर कानून मंत्री और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल के बीच हुई जुबानी भिंड़त

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(image credits: NEWS18)

लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग पर कई आरोप लगाए गए, विपक्षी पार्टियों द्वारा चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष न रखने को लेकर आयोग पर सवाल खड़े किये गए। वहीं मौजूदा सरकार के कुछ नेता इलेक्शन कमिशन का बचाव करते भी नजर आये। चुनाव परिणाम आये हुए लग़भग एक महीने से अधिक हो गए है। भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर नरेंद्र मोदी को देश का प्रधानमंत्री चुना।

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चुनाव आयोग पर आरोप लगाने के सिलसिले में एक बार फिर विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता और मौजूदा सरकार के नेता के बीच बहस देखी गई। दरअसल इस बार कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के बीच संसद में चुनाव सुधार और चुनाव आयोग (ईसी) के मुद्दे पर जुबानी भिंड़त हो गई। एक का पक्ष था की क्या चुनाव आयोग 2019 के आम चुनावों के दौरान सो रहा था, जबकि दूजे ने जवाब में इसे विपक्ष का डबल स्टैंडर्ड (दोहरा चरित्र) करार दिया।

अब हम आपको इस पुरे वाक्यां के बारे में बताते है, बात यह है की 3 जुलाई बुधवार को राज्यसभा में चुनावी सुधार पर चर्चा हो रही थी। इस दौरान तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओब्रायन ने संसद के उच्च सदन में चुनावी सुधार के साथ चर्चा की शुरुआत की और आगे ‘एक देश, एक चुनाव’ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा, “हमारी ओर से चीजों का हल यही होना चाहिए कि हम किसी चीज में जल्दबाजी न दिखाएं।”

इसके आलावा तृणमूल सांसद ने हाल की चुनावी व्यवस्था के बारे में भी बात की, जिसमें डेटा और ईवीएम के गलत इस्तेमाल का विषय शामिल था। इसी पर कांग्रेस नेता का व पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग द्वारा मार्च में जारी की गई एक एडवाइजरी का हवाला दिया, जिसमें चुनाव के दौरान सेना का राजनीतिकरण न करने के लिए कहा गया था। सिब्बल ने बताया कि आखिर कैसे तब भारतीय सैनिकों के नाम पर (बीजेपी द्वारा) वोट बंटोरे गए थे। उन्होंने आगे कहा, “चुनाव के दौरान ईसी सो रहा था।”

प्रधानमंत्री मोदी के अगुवाई वाली NDA सरकार में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) विवाद पर विपक्ष के दोहरे चरित्र के बारे में बताया। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “जब मनमोहन सिंह ईवीएम के जरिए जीते थे, तब किसी ने इस प्रक्रिया पर प्रश्न नहीं खड़े किए। अगर पार्टियां अपने घोषणा-पत्र में राष्ट्रद्रोह कानून को खत्म करने की बात शामिल करेंगी, तब लोगों के पास भी अधिकार होगा कि कौन इस देश की रक्षा करेगा।”


मौजूदा सरकार और चुनाव आयोग को उनपर उठ रहे सवालों को अनदेखा नहीं करना चाहिए। जब भी चुनाव आयोग पर विपक्षी पार्टियों द्वारा EVM को लेकर सवाल उठाये जाते है तो बीजेपी नेताओं द्वारा विपक्ष दलों का विरोध करते हुए आयोग का बचाव किया जाता है। सरकार और चुनाव आयोग को लोगो और विपक्षी पार्टियों को EVM के संदर्भ में उठने वाले सभी सवालों के जवाब दे देने चाहिए, जिससे की सब कुछ साफ हो सके।

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