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मोदी सरकार और योगी सरकार में हुआ मतभेद, केंद्रीय मंत्री ने योगी पर दिया बयान

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(image credits: NewsX)

केंद्र की बीजेपी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के बीच मतभेद देखना को मिल रहा है। यह मतभेद पिछले दिनों योगी सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के कारण सामने आया है। दरअसल कुछ दिनों पहले योगी आदित्यनाथ द्वारा पिछड़े वर्ग के लोगो को अनुसूचित जाति में शामिल करने का फैसला लिया गया। उनके इसी फैसले से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने नाराजगी जताई है।

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उन्होंने उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना इस प्रकार के फैसले लेने से नाराजगी जताई है। गहलोत ने राज्यसभा के शून्यकाल के दौरान बयान देते हुए कहा, ‘‘यह उचित नहीं है और राज्य सरकार को ऐसा नहीं करना चाहिए.”

शून्यकाल में यह मुद्दा बीएसपी के सतीश चंद्र ने उठाया, उन्होंने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल 17 समुदायों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने का उत्तर प्रदेश सरकार का फैसला असंवैधानिक है क्योंकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की सूचियों में बदलाव करने का अधिकार केवल संसद को है। इस पर गहलोत ने कहा, किसी भी समुदाय को एक वर्ग से हटा कर दूसरे वर्ग में शामिल करने का अधिकार केवल संसद को है। ”पहले भी इसी तरह के प्रस्ताव संसद को भेजे गए लेकिन सहमति नहीं बन पाई.” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को समुचित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए अन्यथा ऐसे कदमों से मामला अदालत में पहुंच सकता है।

सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 341 के उपवर्ग (2) के अनुसार, संसद की मंजूरी से ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की सूचियों में बदलाव किया जा सकता है। मिश्र ने कहा ‘‘यहां तक कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की सूचियों में बदलाव करने का अधिकार (भारत के) राष्ट्रपति के पास भी नहीं है.”

उन्होंने बताया योगी सरकार द्वारा पिछड़े वर्ग की जिन 17 जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किया गया है, अब उन लोगो को न ही अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत मिलने वाले लाभ हासिल होंगे और न ही अनुसूचित जाति के तहत मिलने वाले लाभ हासिल हो सकेंगे। क्योंकि अनुसूचित जाति की सूची में बदलाव करने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है।


बता दे की 24 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने जिला मजिस्ट्रेटों और आयुक्तों को आदेश दिया था कि वे अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल 17 समुदायों कश्यप, राजभर, धीवर, बिंद, कुम्हार, कहार, केवट, निषाद, भार, मल्लाह, प्रजापति, धीमर, बठाम, तुरहा, गोड़िया, मांझी और मचुआ को जाति प्रमाणपत्र जारी करें। सतीश चंद्र मिश्र ने कहा, ‘‘बीएसपी चाहती है कि इन 17 समुदायों को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए लेकिन यह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए और आनुपातिक आधार पर अनुसूचित जाति का कोटा भी बढ़ाया जाना चाहिए.” इसके साथ ही उन्होंने कहा की संसद का अधिकार संसद में ही रहने देने चाहिए। राज्य को यह अधिकार नहीं लेना चाहिए।

योगी सरकार द्वारा संसद में बिना समुचित प्रक्रिया पालन किये इस प्रकार का फैसला लेना असंवैधानिक है। अब यहाँ देखने वाली बात यह है की अब जब उनके ही मंत्री थावर चंद गहलोत ने इसका विरोध किया गया है तो जल्द से जल्द योगी के आदेश को वापस लिया जाना चाहिए। बसपा नेता मिश्र ने भी केंद्र सरकार से योगी आदित्यनाथ के फैसले को वापस लेने का परामर्श जारी करने का अनुरोध किया है।

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