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विधानसभा चुनाव में दलित मतदाताओं को लामबंद करने के लिए कांग्रेस ने लिया यह फैसला

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(image credits: moneycontrol)

लोकसभा चुनाव में हार मिलने के बाद कॉग्रेस आने वाले विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने लिए अपनी तैयारी शुरू कर दी है।  महारष्ट्र, झारखंड और हरियाणा में होने वाले चुनाव को देखते हए पार्टी ने दलित मतदाताओं को लामबंद करने की कोशिश कर रही है। इसके लिए कांग्रेस विधानसभा स्तर पर अनुसूचित जाति के समन्वयकों की नियुक्ति करेगी और ‘संविधान से स्वाभिमान यात्रा’ निकालेगी। 

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पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पिछले सप्ताह कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ मुलाकात की थी जिसमें उन्हें दलितों के बीच पार्टी के आधार को मजबूत बनाने के लिए तेजी से काम करने का निर्देश दिया गया था। कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रमुख नितिन राउत के मुताबिक सोनिया गांधी उनका संगठन दलित समाज को लामबंद करने के लिए कई स्तरों पर काम करने जा रही है। जिसमे हर विधानसभा क्षेत्र में समन्वयक की नियुक्ति और ‘संविधान से स्वाभिमान यात्रा’ निकालना प्रमुख है। 

राउत ने ”पीटीआई-भाषा” को बताया, ”हम सितंबर के पहले सप्ताह तक महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा में अपने विभाग के समन्वयकों की नियुक्ति कर देंगे. ये समन्वयक पार्टी के स्थानीय संगठन के साथ मिलकर दलित समाज के इलाकों एवं बस्तियों में सभाओं और जनसंपर्क कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे.”

उन्होंने आगे कहा, ”इसके साथ ही हम विधानसभा क्षेत्रों में ‘संविधान से स्वाभिमान’ यात्रा निकालेंगे. इस यात्रा में मुख्य रूप से आरक्षित सीटों को कवर किया जाएगा.” आपको बता दें की महाराष्ट्र की कुल 288 विधानसभा सीटों में से 29 सीटें अनसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं तो दलित मतदाताओं की संख्या करीब 13 फीसदी है। 

 हरियाणा की बात करे तो यहां भी दलित मतदाता किसी भी पार्टी के हार जीत के लिए निर्णायक शाबित हो सकते है। हरियाणा की कुल 90 विधानसभा सीटों में से अनुसूचित जाति के लिए 17 सीटें आरक्षित हैं।  राज्य में दलित मतदाताओं की कुल संख्या तकरीबन 21 फीसदी है। 


बीजेपी शासित झारखण्ड में 81 विधानसभा सीटों है जिसमे नौ सीटें अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं। वहीं राज्य में दलित मतदाताओं की संख्या 10 फीसदी से अधिक है। 

राउत ने बताया, हम दलित मतदाताओं के बीच मुख्य रूप से संविधान की मूल भावना को लगातार प्रभावित किए जाने, आरक्षण को निशाना बनाने और अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति में कटौती किये जाने के मुद्दे उठाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि उनका संगठन दिल्ली में संत रविदास का मंदिर तोड़े जाने का मुद्दा भी दलित समाज के बीच जोरशोर से उठाएगा। 

अब देखना यह होगा की कांग्रेस किस प्रकार स्वाभिमान यात्रा के सहारे लोगो को प्रभावित करने में कामयाब हो पायेगी। इसके साथ ही यह भी गौर करना होगा की आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के पास जाति के आलावा और कौन कौन से मुद्दे होंगे। 

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