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कांग्रेस महिला अध्यक्ष ने NRC को लेकर अमित शाह पर लगाए यह आरोप

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(image credits: dna india)

मौजूदा सरकार द्वारा लाए गए NRC नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजन पर कुछ विपक्षी पार्टियों ने विरोध जताया। इसी प्रकार एक बार फिर कांग्रेस पार्टी के नेता ने गृह मंत्री अमित शाह पर लोगो में डर पैदा करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस की महिला अध्यक्ष सुष्मिता देव ने बुधवार को कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) को लेकर गैर जिम्मेदाराना बयान नहीं देने चाहिए।

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सुष्मिता देव ने कहा, शाह लोगों में डर पैदा कर रहे हैं। उन्हें इस तरह के बयान देने से बचना चाहिए। एनआरसी के प्रकाशन की आखिरी तारीख 31 अगस्त है। दरअसल गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा था की, NRC से बाहर लोगो को देश से निकालने की जरूरत है

अमर उजाला पर छपी खबर के अनुसार, नागपुर में एक प्रेस कांफ्रेंस में देव ने कहा, ‘असम के लोग शांति प्रिय हैं। एनआरसी के प्रकाशन के बाद राज्य में किसी तरह की हिंसा या गड़बड़ी नहीं होगी। मैं अमित शाह से कहना चाहती हूं कि उन्होंने संसद में कहा था कि 40 लाख लोग जो एनआरसी की सूची से बाहर हैं वे घुसपैठिए हैं और उन्हें बाहर निकालने की जरूरत है।

उन्होंने आगे कहा, यह कहना सही नहीं है, एनआरसी में शामिल न होने वाले 40 लाख लोगों में से लगभग 30 से 40 प्रतिशत लोग अंतिम एनआरसी में शामिल होंगे क्योंकि मामूली वर्तनी या लिपिकीय त्रुटियों के कारण उनका बहिष्कार किया गया।’

बता दे की इससे पहले गृह मंत्रालय ने लोगों का भय दूर करने के लिए साफ तौर पर कहा था कि यदि किसी व्यक्ति का नाम एनआरसी की अंतिम सूची में शामिल नहीं किया जाता तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह विदेशी घोषित हो जाएगा।


वहीं फॉरेनर्स एक्ट 1946 और फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ऑर्डर 1964 के अनुसार भी किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित करने का अधिकार सिर्फ विदेशी ट्रिब्यूनल के पास है।

बता दे की नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजन का पहला ड्राफ्ट पिछले साल 30 जुलाई को प्रकाशित हुआ था। जिसमें असम के 3.29 करोड़ लोगों में से 2.9 करोड़ लोगों के नाम सूची में शामिल नहीं थे। जिसके कारण इसको लेकर विवाद भी खड़ा हुआ। फिर इसके बाद जून 2019 में ड्राफ्ट प्रकाशित हुआ तो इसमें भी एक लाख लोगों के नाम नहीं थे। वहीँ अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 31 अगस्त को अंतिम सूची प्रकाशित होगी।

सुप्रीम कोर्ट एनआरसी की प्रक्रिया की निगरानी कर रही है। इसका उद्देश्य असम में अवैध अप्रवासियों की पहचान करना है। यदि 2011 की जनगणना को देखा जाए तो राज्य की कुल जनसंख्या 3.11 करोड़ से ज्यादा थी। यहाँ आपका यह जानना जरुरी है की NRC में बहुत से ऐसे लोगो के नाम नहीं थे जो की भारत के नागरिक है जिसके कारण NRC विवादों में भी रहा है।

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