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गृहमंत्री अमित शाह ने जज से लिया पुरानी रंजिश का बदला, प्रमोशन पर केंद्र ने लगाई रोक

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(image credits: India Legal)

दूसरी बार सत्ता में वापसी करने वाली नरेंद्र मोदी सरकार इन दिनों अपनी ही मनमानी में लगी हुई है, मोदी सरकार के मंत्री अब उन अधिकारियो, जजो और मंत्रियो से पूरी कसर निकाल रहे है जिन्होंने एक समय पर उनके खिलाफ करवाई कर थी।

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हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह बॉम्बे हाइकोर्ट में कार्यरत न्यायाधीश जस्टिस अकील अब्दुलहमीद कुरैशी से अपनी पुरानी रंजिश का बदला ले रहे है। जस्टिस कुरैशी वही है जिन्होंने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में भूमिका के कारण अमित शाह को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था।

आपको बता दे की सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा उच्च न्यायापालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में कुछ नाम केंद्र सरकार को सहमति के लिए भेजे गए थे, जिसके बाद केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा भेजे गए नामो में से एक नाम पर सहमति नहीं जताई है।

बॉम्बे हाइकोर्ट में कार्यरत न्यायाधीश जस्टिस अकील अब्दुलहमीद कुरैशी का नाम प्रमोशन करके मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर भेजने की कॉलेजियम की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने सहमति नहीं जताई है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर प्रमोशन करके जस्टिस कुरैशी को भेजा जाना था जिसकी सिफरिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा केंद्र सरकार को भेजी गई थी अब जिस तरह से केंद्र सरकार उनके प्रमोशन पर कुंडली मार कर बैठी है, वह इस बात का खतरनाक संकेत बनकर सामने आया है कि अपने दूसरे कार्यकाल में मोदी सरकार कॉलेजियम के साथ कैसा सुलूक करनेवाली है यहाँ तक की वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा भेजे गए नामो पर सहमत नहीं है।


10 मई को भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमन्ना की सदस्यता वाले सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने गुजरात उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस कुरैशी को मध्य प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर पदोन्नति देने की सिफारिश की। वर्तमान में वे तबादले के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट में काम कर रहे हैं। कॉलेजियम कुरैशी को प्रमोशन देने का इच्छुक था, क्योंकि मध्य प्रदेश के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश एसके सेठ 9 जून को रिटायर होनेवाले थे। कॉलेजियम ने जस्टिस कुरैशी को हर तरह से जस्टिस एसके सेठ के बाद उनकी कुर्सी पर बैठने के योग्य पाया गया।

जस्टिस कुरैशी के साथ, कॉलेजियम ने प्रमोशन के लिए तीन और नामों की सिफारिश की. जस्टिस रामासुब्रमण्यम और आरएस चौहान को क्रमशः हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना हाइकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इन तीन नामो में से दो नामो पर केंद्र सरकार ने सहमति दे दी लेकिन जस्टिस कुरैशी के नाम पर अभी तक रोक लगी हुई है यह सब गृहमंत्री अमित शाह के इशारो पर पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए किया जा रहा है।

वही अब केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मामले में जस्टिस कुरैशी को प्रमोशन देने की सिफारिश को मानने से साफ़ इनकार कर दिया और 10 जून से जस्टिस रविशंकर झा की नियुक्ति कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के तौर पर करने की अधिसूचना जारी कर दी। यानी अब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश के तौर पर जस्टिस कुरैशी के बदले जस्टिस रविशंकर झा को नियुक्त किया जायेगा। हांलांकि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के वरिष्ठतम जूनियर जज जस्टिस झा इस तरह से पदोन्नति पाने के हकदार हो गए जबकि उनसे अधिक प्रबल दावेदार और सीनियर जज जस्टिस कुरैशी को यह पद नहीं दिया गया।

जस्टिस कुरैशी मार्च, 2022 में सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन कॉलेजियम की सिफारिश के बावजूद एक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर उनकी पदोन्नति नहीं किए जाने से उनके करिअर को गलत तरीके से नुकसान पहुंचेगा जिसके जिम्मेदार केंद्र सरकार है वह अपने मुताबिक ही देख की कानून व्यवस्था और जजो की नियुक्ति करना चाहती है चाहे उस पद के लिए कोई बेहतर विकल्प उपलब्ध हो या नहीं केंद्र सरकार अपनी रंजिश का बदला लेने के लिए कुछ भी करने को उतारू है चाहे उससे देश की कानून व्यवस्था को ही नुक्सान क्यों न हो रहा हो।

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