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भारत में भी ‘स्टेट एक्टर्स’ के जरिए सोशल मीडिया पर प्रोपेगंडा चला रही बड़ी पार्टियां, सर्वे में आये सामने

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(image credits: prezi)

सोशल मीडिया का प्रयोग आज कल एक बडे स्तर पर पहुंच चूका है। चुकि इसके जरिये बहुत से लोगो को एक साथ लगभग किसी भी प्रकार का संदेश भेजा जा सकता है। इसलिए देशभर में बड़ी
राजनीतिक पार्टियों द्वारा सोशल मीडिया का प्रयोग लोगो को प्रभावित करने में किया जाता है। खासकर चुनाव के दौरान इस प्रकार की गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी जाती है।

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वहीँ इसी संदर्भ में विश्व में एक डेटा सामने आया है। जहां ट्विटर और फेसबुक के जरिए अफवाह फैलाई जाती है। इन्हें ‘स्टेट एक्टर्स’ के नाम से जाना जाता है, जो सोशल मीडिया के जरिए विश्व भर की जनता को प्रभावित करने के लिए प्रौपगैंडा फैलाते हैं। विश्व भर के देशो में भारत भी शामिल है जिसमे सोशल मीडिया का प्रयोग राजनीतिक पार्टयों द्वारा बखूबी किया जा रहा है।

यह खुलासा गुरुवार को ऑक्सफोर्ड में ‘कम्प्यूटेशनल प्रोपगैंडा प्रोजेक्ट की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में “साइबर ट्रूप्स” के कम से कम सात उदाहरण पाए गए और इनमें निजी तौर पर काम करने वाले सबसे ज्यादा “साइबर ट्रूप्स” एक्टिव दिखाई दिए।

रिपोर्ट के अनुसार, “सरकार या राजनीतिक दलों के लिए काम करने वालों के पास ऑनलाइन जनता की सोच को बदलने का टास्क होता है।” साथ ही रिपोर्ट में यह भी बताया गया है की सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि, मलेशिया, फिलिपिंस, यूएई और अमेरिका में भी इस तरह के प्रयोग का दायरा काफी ज्यादा है।

रिपोर्ट में भारत के “साइबर ट्रूप्स” को “मध्यम-क्षमता” वाला बताया गया है। इसमें कहा गया है, “50-300 लोगों के आकार वाली कई टीमें, ढेर सारे कॉन्ट्रैक्ट और विज्ञापन पर खर्च का मूल्य 1.4 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। वहीँ इस श्रेणी के अन्य देश ब्राजील, पाकिस्तान और ब्रिटेन है।


तीन वर्षों में शोधकर्ताओं ने 70 देशों की जांच की, जहां साइबर अभियान तीन तरह के काम करते हैं: मौलिक मानवाधिकारों को दबाने, राजनीतिक विरोध को खारिज करने और राजनीतिक असंतोष को बाहर निकालने के लिए। अप्रैल में लोकसभा चुनाव को देखते हुए फेसबुक ने इन मामलों से संबधित 700 से अधिक खातों को हटा दिया गया। जिन लोगों के खाते हटाए गए हैं, उसमे सिल्वर टच, जो बीजेपी के लिए काम कर चुकी है और दूसरा कांग्रेस का आईटी सेल है।

भारत के संदर्भ में देखा गया कि इसका प्रयोग अफवाह फैलाने और मीडिया को भ्रमित करने, डाटा की रणनीति को आगे बढ़ाने, हैशटैग के जरिए कंटेंट को प्रचारित करने और ट्रोल आर्मी के जरिए उन लोगों की फजीहत करने में की गई, जो राय विशेष से सहमत नहीं होते थे। इनके टारगेट पर विरोधी पक्ष और पत्रकार ज्यादा थे।

इस शोध से पता चलता हो किस तरह देश में प्रमुख पार्टियां सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल करके लोगो के विचारो को प्रभावित करती है। जिसके सहारे पार्टियां राजनितिक लाभ उठाने का प्रयास करती देखी जा सकती है।

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