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उपचुनाव को देखते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने लिया निर्णय, पार्टी संगठन में किया बड़ा बदलाव

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(image credits: news nation)

बसपा सुप्रीमो मायावती उत्तर प्रदेश में आने वाले उपचुनाव को लेकर पूरी तैयारी में जुटती दिख रही है। बसपा प्रमुख ने इसको देखते हुए बड़ा कदम उठाया है, उन्होंने पार्टी के संगठन में बड़ा बदलाव किया। बसपा प्रमुख ने पहली दफे किसी यादव नेता को लोकसभा में अपने संसदीय दल का नेता बनाया है। 2019 लोकसभा चुनाव में जौनपुर से सांसद चुने गए रिटायर्ड पीसीएस श्याम सिंह यादव को दानिश अली  का स्थान दिया गया है।

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इससे पूर्व राज्यसभा सांसद एम अली को बीएसपी का उत्तर प्रदेश अध्यक्ष भी नियुक्त किया। पार्टी की तरफ से जारी किये गए बयान में कहा गया की,  ‘बहुजन समाज पार्टी सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय के सिद्धांत में विश्वास रखती है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है। राज्य में संगठनात्मक स्तर पर कुछ फेरबदल की जरूरत थी। मुन्काद अली को आरएस कुशवाहा की जगह यूपी बीएसपी का प्रमुख बनाया गया है। कुशवाहा को पार्टी की केंद्रीय ईकाई का महासचिव बनाया जा चुका है। लोकसभा में गिरिश चंद्र जाटव पार्टी के मुख्य सचेतक बने रहेंगे।’

बता दे की इसी वर्ष जून में बीएसपी ने नगीना से दलित सांसद गिरिश चंद्र को अपने 10 सदस्यीय दल का नेता चुना था।  श्याम सिंह यादव को उस दौरान उप नेता और अमरोह सांसद कुंवर दानिश अली को मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया था।

 मालूम हो की बीएसपी ने जून में दलित-यादव-मुस्लिम का सामाजिक समीकरण बिठाया था।  उस दौरान बसपा और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन था। माना यह जाता रहा है की सपा बसपा गठबंधन के कारन ही मायावती ने इस प्रकार जातीय समीकरण पर ध्यान दिया था। परन्तु अब सपा बसपा दोनों अलग हो गए है।  बसपा सुप्रीमो ने गठबंधन के खराब प्रदर्शन के लिए समाजवादी पार्टी को जिम्मेदार ठहराया और गठबंधन से अलग हो गई थी। बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा के पांच और बीएसपी के 10 सांसद चुने गए थे। हालांकि गठबधन से अलग होने के बाद मायावती ने पारिवारिक रिश्ते में कोई कमी नहीं आने की भी बात कही थी। 

मायावती द्वारा उपचुनाव को लेकर की गई तैयारी से लगता है की उन्होंने इसको जीतने की ठान लिया है। लोकसभा चुनाव में हार मिलने की बाद बसपा प्रमुख इस चुनाव में जीत हासिल करने के लिए कोई भी कसर नहीं छोडना चाहती है। देखा जाए तो उनका यह कदम राजनीति रूप से सराहनीय है। धीरे धीरे मायावती को अपनी पार्टी को और भी सख्त बनाने की जरूरत है, जिससे की हमें आने वाले समय में एक बेहद मजबूत विपक्ष देखने को मिल सके। जो सरकार की हर फैसले पर सवाल खड़ा कर सके।


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