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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव: बीजपी की बढ़ी मुश्किलें, जातीय संघर्ष और किसानों की नाराजगी है कारण

The Chief Minister of Madhya Pradesh, Shri Shivraj Singh Chouhan calling on the Prime Minister, Shri Narendra Modi,
(Image Credits: pib.nic.in)

मध्य प्रदेश में बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। राज्य में बीजेपी को अपने पिछले 15 सालों से चल रहे सत्ता विरोधी लहर से निपटना होगा। बीजेपी के लिए किसानों की नाराजगी, एससी एसटी पर हुए जातीय संघर्ष और बड़ी संख्या में पार्टी में बागियों की मौजूदगी ने हालातों को और अधिक मुश्किल बना दिया है। ऐसे में बीजेपी को सिर्फ मुख्यमंत्री शिवराज के कार्यों और प्रधानमंत्री मोदी के छवि पर ही भरोसा करना पड़ेगा।

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सरकार द्वारा लाई गई भावांतर योजना किसानों के लिए वरदान साबित होनी चाहिए थी। इस योजना के अनुसार राज्य सरकर द्वारा घोषित एमएसपी से जितना कम भाव किसानों को आढ़तियों से प्राप्त होगा, उसका अंतर सरकार देगी। इसके साथ साथ मौसम से फसल खराब होने के कारण हुए नुक्सान की भरपाई फसल बीमा योजना के तहत की जानी थी। इस योजना के मुताबिक़ किसानों को किसी भी स्थिति में नुकसान के लिए फ़िक्र नहीं करना था।

इसके बाद भी राज्य में किसानों की स्थिति में कुछ भी बदलाव नहीं हुआ। आढ़तियों ने मूल्य यह कह कर गिरा दिए कि नुकसान की भरपाई तो सरकार भावांतर योजना के तहत कर देगी। लेकिन इस भरपाई को होने में 3 से 4 महीने का समय लग जाता है और इसके लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर भी काटने पड़ते हैं। फसल बीमा योजना की स्थिति भी ठीक नहीं है। सिर्फ गिने चुने किसान ही इसकी शर्तें पूरी कर पाते हैं और मुआवजा भी आधा अधूरा मिल रहा है।

एससी-एसटी एक्ट के कारण बढ़ती मुश्किलें

दूसरी ओर भाजपा के लिए एससी-एसटी एक्ट को लेकर समाज में खाई और गहरा गई है। इस मुद्दे को लेकर ग्वालियर भिंड के इलाके में आंदोलन भड़क गया था। पहले दलित नाराज हुए तो शिवराज सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निपटने के लिए अध्यादेश लाई, जसके बाद स्वर्ण नाराज हो गए। स्वर्णो को लगा की बीजेपी सरकार दलित वोटों के लिए उनके वोटों का हनन कर रही है, फिर उन्होनें भी इसके लिए जबरदस्त आंदोलन छेड़ दिया।


इस जातीय संघर्ष में 7 लोगों की जाने गई, जिसमें से 6 दलित थे। सवर्णों ने यहां अपनी पार्टी स्पाक्स बना ली है और वे चुनाव लड़ रहे हैं। यह माना जा रहा है की दलितों की नाराजगी और सवर्णों की बेरुखी भाजपा को मुश्किल में डाल सकती है। इसके बावजूद भी अगर चुनाव में भाजपा विजयी होती है तो इसके पीछे का कारण बीजेपी का बेहतर संगठन, प्रधानमंत्री मोदी और शिवराज की लोकप्रियता और कांग्रेस का कमजोर संगठन होगा।

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