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हरियाणा में चुनाव को लेकर मायावती ने समाप्त किया गठबंधन, बताई यह बड़ी वजह

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(image credits: patrika)

देश में आने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए लगभग सभी पार्टियों द्वारा अपने स्तर पर तैयारियां चल रही है। वहीं कुछ पार्टियों ने इस चुनाव में गठबधन से अलग होकर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। महराष्ट्र में शिवसेना से इस बार बीजेपी से चल रहे टकराव को देखते हुए अपने बल पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। आपको बता दे की अक्टूबर में हरियाणा और महारष्ट्र
में विधानसभा चुनाव होने को है। वहीँ 2020 में दिल्ली और पांडुचेरी समेत अन्य राज्य में भी चुनाव आने वाले है।

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इसी प्रकार बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने हरियाणा में आने वाले विधानसभा आम चुनाव में गठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। दरअसल बसपा सुप्रीमो मायवती ने दुष्यंत चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी से गठबंधन तोड़ने की घोषणा कर दी है। मायावती ने कहा कि दुष्यंत चौटाला की पार्टी के साथ सीटों के बंटवारे पर समझौता नहीं हो सका है।

उन्होंने कहा कि दुष्यंत चौटाला के अनुचित रवैये के कारण सीटों के बंटवारे का समझौता नहीं हो पाया है और बसपा की हरियाणा यूनिट के सुझाव पर गठबंधन समाप्त करने का फैसला किया गया है। बसपा सुप्रीमो ने अपने ट्वीट में दी जानकारी में बताया है की, ”बीएसपी एक राष्ट्रीय पार्टी है जिसके हिसाब से हरियाणा में होने वाले विधानसभा आमचुनाव में श्री दुष्यन्त चैटाला की पार्टी से जो समझौता किया था वह सीटों की संख्या व उसके आपसी बंटवारे के मामले में उनके अनुचित रवैये के कारण इसे बीएसपी हरियाणा यूनिट के सुझाव पर आज समाप्त कर दिया गया है।”

इसके साथ ही मायावती ने हरियाणा की सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान भी किया, उन्होंने अगले ट्वीट संदेश में लिखा ”ऐसी स्थिति में पार्टी हाईकमान ने यह फैसला किया है कि हरियाणा प्रदेश में शीघ्र ही होने वाले विधानसभा आमचुनाव में अब बीएसपी अकेले ही अपनी पूरी तैयारी के साथ यहाँ सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी।”

मालूम हो की लोकसभा चुनाव में खासा प्रदर्शन न करने के बाद मायावती ने समाजवादी पार्टी से गठबधन तोड़ने के निर्णय लिया था। साथ ही उन्होंने लोकसभा चुनाव के बाद उपचुनाव में अपने बल पर लड़ने का फैसला लिया था। हालाँकि उन्होंने गठबंधन तोड़ने के बाद सपा से पारिवारिक रिश्तो में कोई भी प्रभाव न पड़ने की बात भी कही थी।


अब देखना यह होगा है की मायावती द्वारा लिए गए फैसले से जनता पर क्या प्रभाव पडते है। मायावती द्वारा गठबंधन तोड़ने का निणर्य स्वाभाविक भी है, क्यूंकि अगर गठबधन में दोनों पार्टियों द्वारा किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं होती है तो आने वाले समय में गठबंधन पर प्रभाव पड़ सकते है।

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