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आरक्षण को लेकर मायावती का बड़ा फैसला, बहुजनों को मिलेगा लाभ

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(image credits: Scroll.in)

लोकसभा में महागठबंधन का समीकरण ठीक तरह से ना बैठने के कारण सपा और बसपा दोनों को ही भारी नुकसान झेलना पड़ा था। जहाँ एक तरफ अभी सपा और बसपा के बीच मन मुटाव की खबरे आ रही है उसी बीच बसपा प्रमुख भी राजनीति के बड़े दाव पेच से यह अनुमान लगाने की कोशिश कर रही है की उत्तर प्रदेश में कैसे जनता के बीच दोबारा विश्वास को कायम किया जा सके। सारे समीकरण को देखते हुए अब बसपा सुप्रीमो ने होने वाले उपचुनाव को अकेले लड़ने का फैसला लिया और इसके लिए नई रणनीति भी तैयार की है।

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आपको बता दे की आरक्षण को लेकर बसपा अध्यक्ष मायावती ने बड़ा दांव खेला है। मायावती ने कहा कि जब सरकार ने आरक्षण के 50 फीसदी के दायरे की सीमा को तोड़ ही दिया है तो आबादी के हिसाब से दलित और पिछड़ों को आरक्षण दिया जाए। हालांकि बसपा का पहले से ही मूलमंत्र रहा है कि जिसकी जितनी भागीदारी उसकी उतनी हिस्सेदारी। बसपा पहले से ही अपने इस मुद्दे को उठाती रही है जिसमे ओबीसी में आने वाले लोगो के आरक्षण को उनकी संख्या के हिसाब से बढ़ाया जाए।

मायावती ने मंगलवार को लखनऊ में मंडल स्‍तरीय नेताओं की बैठक बुलाई थी। इस दौरान उन्होंने नेताओं से कहा कि योगी सरकार द्वारा 17 ओबीसी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने और उपचुनाव से पहले ही इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएं। इसी मुद्दे को लेकर मायावती ने रविवार को विरोध जताया था। हालांकि योगी सरकार के 17 ओबीसी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के फैसले को मोदी सरकार के मंत्री और बीजेपी के दलित चेहरा थावरचंद गहलोत ने राज्यसभा में असंवैधानिक करार दिया है।

उन्होंने कहा कि किसी जाति को किसी अन्य जाति के वर्ग में डालने का काम संसद का है। अगर यूपी सरकार इन जातियों को ओबीसी से एससी में लाना चाहती है तो उसके लिए प्रक्रिया है। ऐसे में राज्य सरकार ऐसा कोई प्रस्ताव भेजेगी तो हम उस पर विचार करेंगे। लेकिन अभी जो आदेश जारी किया है वह संवैधानिक नहीं है। बता दें कि हाल ही में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का आदेश जारी किया है। इनमें 17 जातियों में कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिन्द, भर, राजभर, धीमर, वाथम, तुरहा, गोड़िया, मांझी और मछुआरा शामिल हैं। हालांकि योगी सरकार से पहले मुलायम सिंह और अखिलेश यादव भी इन जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की दिशा में कदम उठाया था।

आरक्षण को लेकर मायावती दलितों के बीच जगह बनाना चाहती हैं और जहा कही बहुजन समाज के विश्वास बसपा के प्रति काम हुआ है उससे एक बार फिर वापस पाया जा सके इसी मद्देनजर उन्होंने दलित और ओबीसी समुदाय के लिए उनके आबादी के लिहाज से आरक्षण की मांग की है। सूबे में 13 विधानसभा सीटें रिक्त हुई हैं, ऐसे में इन सीटों पर उपचुनाव होने हैं. बसपा ने 9 साल के बाद उपचुनाव में उतरने का फैसला किया है. यही वजह है कि मायावती अपने पुराने अंदाज में नजर आ रही हैं और अपने मूल वोटबैंक को साधने की पूरी रणनीति बनाई है।


मायावती ने मंगलवार को बरेली, कानपुर, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, आगरा और अलीगढ़ समेत कई और जिले के नेताओं के साथ बैठक की इस दौरान में पार्टी के सभी पदाधिकारियों के साथ सांसद और जोनल को-ऑर्डिनेटर उपस्थित थे। बसपा अध्यक्ष मायावती ने यूपी को 4 सेक्टरों में बांटने के साथ संगठन को मजबूत बनाने का निर्देश दिया है। सेक्टर गठन के बाद वह पहली बार संगठन की गतिविधियों को लेकर बैठकें करने जा रही हैं. बैठकों में सेक्टरवार दी गई जिम्मेदारियों की समीक्षा की. इसमें बूथ व सेक्टर गठन के साथ भाईचारा कमेटियां बनाने का आदेश दिया।

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