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पीएम मोदी ने फिर दोहराई गलती, सीताराम केसरी को बताया दलित, कहा- सोनिया को अध्यक्ष बनाने के लिए पार्टी से बाहर फेंका

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(Image Credits: The Wire)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान सीताराम केसरी को दलित बता दिया। उन्होंने कहा की कांग्रेस सोनिया गाँधी को अध्यक्ष बनाने के लिए कांग्रेस ने सीता राम केसरी को पार्टी से बाहर निकालकर फेंक दिया। बता दें की सीताराम केसरी दलित नहीं थे, बल्कि वो पिछड़े समाज ‘बनिया’ से थे।

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सीताराम केसरी बिहार से सटे दानापुर के रहने वाले थे। प्रधानमंत्री मोदी ने छिंदवाड़ा में कहा, “मैंने कांग्रेस को चुनौती दी थी। मैंने उनसे कहा कि नेहरू जी की मेहरबानी है कि चायवाला प्रधानमंत्री बन गया। ये क्रेडिट लेने के लिए ऐसी-ऐसी चीजें खोज के ले आते हैं। अगर उन्होंने इतनी उदार परंपरा स्थापित की है, इतने उदार लोकतांत्रिक मूल्यों से वे समर्पित हैं, तो मैंने कहा था कि पांच साल के लिए इस परिवार के बाहर के किसी व्यक्ति को कांग्रेस अध्यक्ष बना कर के देखें।”

इसके बाद प्रधाममंत्री ने अपने भाषण में कहा, “प्रधानमंत्री की बात छोड़ो, सिर्फ गांधी-नेहरू परिवार के बाहर के किसी व्यक्ति को कांग्रेस का अध्यक्ष बना कर के देखें। इसके बाद उनके एक राज दरबारी राग दरबारी लेकर मैदान में आ गए। उन्होंने खाता खोल दिया कि ये बनें थे, वो बनें थे। लेकिन ये मेरे सवाल का जबाव नहीं है। मेरा सवाल है कि पांच साल के लिए इस परिवार के बाहर के एक व्यक्ति को अध्यक्ष बनाकर के देख लीजिए। देश को पता है कि सीताराम केसरी, दलित, पीडि़त और शोषित समाज से आए हुए व्यक्ति को पार्टी अध्यक्ष पद से कैसे हटाया गया? कैसे बाथरूम में बंद कर दिया गया था? कैसे दरवाजे से निकालकर के उठाकर के फुटपाथ पर फेंक दिया गया था? इसके बाद मैडम सोनिया जी को बैठा दिया गया था।”

मोदी ने कहा की कांग्रेस प्रधानमंत्री बनाने की बात छोड़ दे सिर्फ वह गाँधी नेहरू परिवार के बाहर से किसी को कांग्रेस का अध्यक्ष ही बना के दिखा दे। पांच साल के लिए गाँधी नेहरू परिवार के बाहर से किसी को कांग्रेस अध्यक्ष बना कर देखे। उन्होनें कहा के सीता राम केसरी को कांग्रेस ने दरवाजे से निकालकर फुटपाथ पर फेंक दिया और उनकी जगह सोनिया गाँधी को बैठा दिया।

इसके बाद मोदी ने अपने भाषण में कहा, “ये इतिहास हिंदुस्तान भली-भांति जानता है। दलित हो, पीडि़त हो, वंचित हो, पिछड़ा हो, अगर वो कांग्रेस अध्यक्ष बन भी गया और उनकी मजबूरी में बना था। उसको भी वे दो साल झेल नहीं पाए। स्वीकार नहीं कर पाए। सम्मान की बात तो जाने दीजिए। वे कैसे पांच साल के लिए इस परिवार के बाहर के किसी व्यक्ति को अध्यक्ष बना सकते हैं। लेकिन झूठ बोलना, सही सवालों के जवाब नहीं देना, उल्टी-पुल्टी बातें कर के गुमराह करना। उनके राग-दरबारी भी कभी सवाल पूछने की हिम्मत नहीं करते हैं क्योंकि नमक भी तो कभी-कभी खाया होता है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए बताते हैं। ये बात तो भारत की जनता अच्छी तरह से जानती है की अगर कोई दलित, पीड़त, वचिंत हो या पिछड़े वर्ग से आता हो अगर वो कांग्रेस का अध्यक्ष बन भी गया हो तो कांग्रेस की इसकी पीछे कोई मजबूरी रही होगी। परन्तु उसको भी वो दो साल के लिए भी झेल नहीं पाए।

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