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राहुल गॉंधी: अगर सत्ता में आये तो नरेंद्र मोदी द्वारा लाये गए तीन तलाक को खत्म कर देंगे

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(Image Credits: Hindustan)

मोदी सरकार द्वारा मुस्लिम महिलाओं के वोट बैंक पाने के लिए लाये गए तीन तलाक के कानून को समाप्त किया जा सकता है। विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने तीन तलाक के कानून को लेकर गुरुवार को एक बड़ा बयान दिया है। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा की केंद्र में उनकी सरकार के आने के बाद वह ट्रिपल तलाक के कानून को खत्म कर देंगे।

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राहुल गाँधी ने यह बयान दिल्ली में गुरुवार को जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में अल्पसंख्यक महाधिवेशन सम्मेलन के दौरान दिया है। इस सम्‍मेलन में कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी समेत अन्‍य कार्यकर्ता भी मौजूद थे। वहीँ इस महाधिवेशन में महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव (Sushmita Dev) ने कहा, ‘अगर हमारी सरकार आई, तो नरेंद्र मोदी सरकार के लाए ट्रिपल तलाक कानून (Triple Talaq) को खत्म कर देंगे…” उन्होंने तीन तलाक के कानून को मुस्लिम पुरुषों को जेल भेजने की बड़ी साजिश की तरह बताया।

कार्यक्रम में राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री के खिलाफ जमकर हमला बोला और कहा , किसी भी देश के पीएम को तोड़ने वाला नहीं, जोड़ने वाला होना चाहिए, नहीं तो ऐसे पीएम को हटा देना चाहिए। इसके साथ साथ राहुल गाँधी ने सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के साथ RSS प्रमुख मोहन भागवत पर भी जमकर हमला बोला। राहुल गांधी ने कहा कि आरएसएस नागपुर से देश चलाना चाहता है, उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ चेहरा हैं जबकि मोहन भागवत उनका रिमोट कंट्रोल हैं।


राहुल गाँधी ने देश में लोकतंत्र के संस्थानों की बात करते हुए भी मोदी सरकार पर आरोप लगाए, और कहा ‘‘नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री होते हुए सुप्रीम कोर्ट के चार जज बाहर आकर कहते हैं कि हमें काम नहीं करने दिया जा रहा है। जस्टिस लोया का नाम लेते हैं और अप्रत्यक्ष रूप से कहते हैं की भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सुप्रीम कोर्ट को काम नहीं करने देते हैं। प्रधानमंत्री मोदी अपने आप को इस देश से भी ऊपर समझते हैं।

आपको यह बता दे की मोदी सरकार ने तीन तलाक बिल पर आम सहमति नहीं बन पाने के बाद 11 जनवरी को बड़ा दांव खेला था। केंद्र सरकार द्वारा इससे जुड़े अध्यादेश को मंजूरी दे दी गई थी। पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इसे मंजूरी भी दे दी गई। बता दें कि तीन तलाक को अपराध करार दिए जाने वाले अध्यादेश की मियाद 22 जनवरी को खत्म हो रही थी। संसद के तत्कालीन सत्र में तीन तलाक से जुड़े बिल को पास कराने की कोशिश भी की गई थी। परन्तु राज्यसभा में विपक्ष ने इसे पास नहीं होने दिया था। विपक्ष ने अपने असहमति की वजह सरकार द्वारा बिल को पेश करने की जल्दबाजी को बताया था।

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