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कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गाँधी ने दिया इस्तीफ़ा, यह दलित नेता हो सकते है अगले अध्यक्ष

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(image credits: IndiaTV)

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के इस्तीफे की चर्चा काफी पहले से चल रही थी। वहीं अब राहुल गाँधी के इस्तीफा देने के बाद सियासत और गरमा गई है। कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद राहुल गांधी की जगह कौन लेगा, इसे लेकर कई अटकले लगाई जा रही है ।

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राजीव गांधी के निधन के बाद कांग्रेस की कमान गांधी परिवार के बाहर के किसी सदस्य को सौंपी गई थी। राजीव गांधी के निधन के बाद कांग्रेस की कमान पी वी नरसिम्हा राव ने संभाली थी और उनके बाद सीताराम केसरी। एक बार फिर ऐसी परिस्थिति बन रही है कि कांग्रेस अध्यक्ष गांधी परिवार से बाहर से किसी को बनाया जाएगा। बुधवार को नए कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के लिए कार्यसमिति की बैठक बुलाई गई है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है। खड़गे पार्टी के वफादार होने के साथ ही दलित चेहरा भी हैं। पिछली लोकसभा में खड़गे पर भरोसा जताते हुए उन्हें कांग्रेस पार्टी के नेता भी बनाया गया था। हालांकि, 2019 में खड़गे कर्नाटक में अपने मजबूत गढ़ माने जानेवाले गुलबर्ग से चुनाव हार गए हैं। पार्टी के एक और वरिष्ठ और दलित नेता सुशील कुमार शिंदे भी सूत्रों के अनुसार अध्यक्ष पद की रेस में हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने के राहुल गांधी के फैसले के बाद से पार्टी उनके विकल्प की तलाश कर रही है। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ कुछ नए चेहरों की भी तलाश जारी है। युवा चेहरों में ज्योतिरादित्य सिंधिया का भी नाम चर्चा में हैं। सूत्रों का कहना है कि सिंधिया को भी युवा चेहरे के तौर पर मौका दिया जा सकता है। हालांकि, खुद ज्योदितरादित्य इस बार अपने पारिवारिक गढ़ गुणा से चुनाव हार गए हैं।

कांग्रेस में जारी परंपरा के अनुसार कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में एक अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा। नए अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए कांग्रेस की देश भर की इकाइयां वोट करेंगी। कांग्रेस के अंदर खुद ऐसी चर्चा है कि नए अध्यक्ष को लोकतांत्रिक तरीके से चुना जाए ताकि काडर के बीच भरोसा कायम हो सके।


कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सोनिया गांधी को भी अध्यक्ष पद के लिए चुनौती मिली थी। उन्होंने कहा, ‘पार्टी के अंदर सर्वमान्य नेता बनने के लिए सोनिया गांधी भी चुनाव प्रक्रिया के द्वारा ही चुनकर आईं थी। कांग्रेस के मुश्किल दिनों में उन्हें पार्टी के कुछ पुराने नेताओं से चुनौती मिली थी और उन्होंने भी बागियों का सामना किया था।’ देखना यह है की क्या कांग्रेस किसी दलित चेहरे को अध्यक्ष बनाती है की नहीं। यह कवायदे अक्सर लगाई जा रही है की जहा एक समय में कांग्रेस को दलितों की भरोसे वाली पार्टी के रूप में भी देखता जाता था अब वह किसी दलित चेहरे पर दाव खेल अध्यक्ष बनाती है।

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