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बीजेपी दलित नेता ने जाति से परेशान होकर उठाया यह कदम, जानिये पूरा मामला

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(image credits: newsexpress100)

देश में जातिओं को लेकर कई लोगो को समस्याओ का सामना करना पड़ता है। आज कल जाति से जुडी कई ऐसी खबरे सामने आती है जिनमे लोगो के नाम और काम से ज्यादा उनकी जाति को तबज्जो दी जाती है। आज कल जाति लोगो के जीवन की एक बड़ी मुश्किल बनी हुई है जिससे उन्हें कई सवालों का सामना करना पड़ता है। लोग जाति के आधार पर एक दूसरे को देखने लगे है।

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जाति से जुड़ा मामला इतना ज्यादा बढ़ चुका है कि यह आम आदमी तक ही सिमित नहीं रहा है। डेली हंट में छपे खबर के मुताबिक बीजेपी के विधायक को भी जाति से जुडी समस्या का सामना करना पड़ा है। जाति समस्याओं से जूझ रहे बीजेपी विधायक ने फैसला किया है की वह अपने नाम के आगे जाति लिखेंगे ताकि सबको पता चल सके की वह किस जाति से है।

दरअसल दलित जाति से तालुक रखने वाले बीजेपी विधायक देशराज कर्णवाल कई समय से जाति को लेकर लोगो के नकारात्मक सवालों का सामना कर रहे थे। ऐसे में उन्होंने बड़ा कदम उठाया है। जातिगत मामला इस हद तक आगे बढ़ गया है की अब आम आदमी के साथ साथ नेता लोग भी जाति जैसे मामलो का शिकार बनते जा रहे है।

दरअसल मामला यह है की झूठा जाति प्रमाणपत्र बनवाने के आरोपों से आहत उत्तराखंड में झबरेड़ा विधायक देशराज कर्णवाल ने निर्णय लिया है कि अब वह अपने नाम के आगे अपनी जाति लिखेंगे।

इसके लिए वे जल्द ही विधानसभा अध्यक्ष को लिखित में पत्र देंगे। पत्रकारों से औपचारिक बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वे 14 साल से जाति को लेकर दंश झेल रहे हैं।


लेकिन अब जाकर उन्हें इंसाफ मिला है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि मामले में चार्जशीट दाखिल होने के साथ ही इस प्रकरण को जानबूझकर लटकाए रखने वाले 17 अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है। डेली हंट में छपे खबर के अनुसार शुक्रवार को रुड़की स्थित एक होटल में वार्ता करते हुए झबरेड़ा विधायक देशराज कर्णवाल ने कहा कि मेरी जाति जो है वही रहेगी। उन्होंने कहा, आज से मैं अपने नाम के आगे जाति लगाऊंगा ताकि लोग स्पष्ट रूप से मेरे नाम के साथ यह भी जान लें कि मेरी जाति क्या है।

जिन लोगों ने मुझे झोझा, मुस्लिम बिरादरी व अन्य बिरादरी का कहा था, वे लोग लगभग दो सप्ताह जेल की हवा खाकर आए हैं। जिन लोगों ने सहारनपुर से जाति प्रमाणपत्र बनवाने का असफल प्रयास किया था उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो गई है।

ऐसे में दलित समाज से तलूक रखने वाले लोग अक्सर जातिवाद सवालों का शिकार बन कर रह जाते है। ना ही काम से ना ही नाम से सिर्फ जाति से ही लोगो को पहचान मिल रही है। बीजेपी की ही पार्टी में जब अपने लोगो को जाति से जुडी समस्या होने लगे तो आम आदमी का क्या होगा।

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