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इस लोकसभा सीट पर है बहुजनों का कब्ज़ा, इसे जितने के लिए कुछ भी कर सकती है भाजपा

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(Image Credits: Daily Rajasthan)

नागपुर लोकसभा सीट पर किसी भी उम्मीदवार की हार या जीत में दलित और ओबीसी के वोटर अहम भूमिका निभाते हैं. इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए तैयारियों में जुटी बीजेपी और कांग्रेस भी अगले महीने होने वाले चुनावों में इन समुदायों के वोट हासिल करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।

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इस सीट पर लोकसभा चुनावों के पहले चरण में यानी 11 अप्रैल को मतदान होगा. इस लोकसभा सीट में बीजेपी की ओर से नितिन गडकरी तो उनके मुकाबले में बीजेपी की संसद सदस्‍यता को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए नाना पटोले हैं।

आपको बता दे की नागपुर में कुल 21,26,574 वोटर है जिसमे महिला वोटरों की संख्या 10,45,934, देखा जाये तो नागपुर में 50 फीसदी वोटर ओबीसी से है और 12 प्रतिशत वोटर मुस्लिम समुदाय के है।

नागपुर की सीट एक तरह से भाजपा के लिए काफी एहम है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय भी यही है. वही बहुजन समाज के लिए भी यह शहर काफी अहम् है नवयान बौद्ध धर्म का एक पवित्र स्मारक यही स्थित है।

भारतीय संविधान के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले बाबासाहेब भीम राव आंबेडकर ने इसी जगह पर 1956 में अपने हजारों समर्थकों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था.नागपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत 6 विधानसभा क्षेत्र हैं. इनमें नागपुर दक्षिण पश्चिम, नागपुर दक्षिण, नागपुर पूर्वी, नागपुर मध्य, नागपुर पश्चिम और नागपुर उत्तर शामिल हैं. नागपुर उत्तर अनुसूचित जाति श्रेणी के लिए आरक्षित सीट है।


इस बार नागपुर सीट को लेकर विश्लेषकों का मानना है कि जहां 2014 के लोकसभा चुनावों में नागपुर में भाजपा को बहुजन समाज का समर्थन मिला था वही इस बार यहाँ का बहुजन समाज किसी अन्य विकल्प पर विचार कर सकता हैं. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी नागपुर से मौजूदा सांसद हैं. कांग्रेस ने पूर्व भाजपा सांसद नाना पटोले को गडकरी के खिलाफ अपना उम्मीदवार बनाया है. नागपुर लोकसभा क्षेत्र के कई हिस्सों में दलित बौद्धों का अच्छा-खासा प्रभाव है.

यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष सुखदेव थोराट ने बताया की इस बार दलितों में भाजपा विरोधी रुझान सामने आ रहे है हालांकि, यह वोट कांग्रेस-राकांपा गठबंधन, प्रकाश आंबेडकर के वंचित बहुजन अघाड़ी (वीबीए) और बसपा सुप्रीमो मायावती के बीच बंट जाएंगे.” उन्होंने कहा कि इन वोटों को बंटने से बचाने का एकमात्र उपाय यह है कि वे एक हो जाएं.

नागपुर उत्तरी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक मिलिंद माने यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष सुखदेव थोराट के आंकलन से असहमत दिखे उन्होंने दावा किया, गडकरी के पक्ष में दलित बौद्ध वोटों का प्रतिशत इस बार 27 प्रतिशत तक जाएगा जबकि पिछले लोकसभा चुनाव में यह महज तीन-चार प्रतिशत था. उनके अनुसार सिर्फ विकास कार्यों के कारण ऐसा नहीं होगा, बल्कि आंबेडकरवादियों के साथ भाजपा का संबंध भी एक बड़ा कारण होगा. बौद्धों ने भाजपा पर विश्वास करना शुरू कर दिया है. भाजपा लगातार बहुजन वर्ग को अपने साथ होने का दावा करती आई है पर सच्चाई सही मायने में क्या है वह परिणाम ही बताएँगे।

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